Ultimate Strategy for Long-Term Success in Stock Market | Trading Strategy That Actually Works
ये लोग बिना किसी फाइनेंशियल एजुकेशन के
सिर्फ सोशल मीडिया की रील्स और
स्क्रीनशॉट्स देकर मार्केट में कूद पड़ते
हैं।
मार्केट में जो सबसे बड़ा मिथ है वो ये है
कि यार सीधा ट्रेडिंग अकाउंट खोल लो और
मार्केट में कूद पड़ो।
इनकम का कितना हिस्सा मुझे बचाना चाहिए कि
[संगीत] मैं आज शेयर बाजार में लगा सकूं
और मेरी रातों की नींद भी ना उठे। डिपेंड
करता है कि आपकी नीड क्या है।
जब मार्केट में स्क्रीन पर रेड और ग्रीन
लाइट दिखती है तो लोग परेशान होने लगते
हैं।
प्रॉब्लम यह है कि लोग किसी भी स्ट्रेटजी
पर उसके प्रॉफिट जोन को देखकर कूदते हैं
ना कि लॉस जोन को देख के।
Telegram और WhatsApp पर शॉर्टकट बताए
जाते हैं। कॉल ले लो और टिप्स ले लो। पैसा
डबल हो जाएगा।
अगर कोई यह बोल रहा है ना कि यहां से
बाजार कहां जा सकता है
तो या तो वह भगवान है या वह झूठ बोल।
नमस्कार आप देख रहे हैं क्लियर काट विद
अंजलि रजावत। आज का एपिसोड बहुत ही खास
होने वाला है क्योंकि आज के एपिसोड में हम
बात करेंगे पैसा, रुपया, दमड़ी की जिसका
सपना आप सुबह उठते ही देखने लग जाते हैं।
सुबह अलार्म बजने से पहले ही आप उठकर
भागने लग जाते हैं। और आज का एपिसोड इसलिए
भी खास है क्योंकि हम ट्रेडिंग और स्टॉक
मार्केट के बारे में बात करेंगे जिसके
बारे में सुनते ही या तो लोग रातोंरात
अमीर बनने का ख्वाब देखने लगते हैं या फिर
उन्हें डर सताता है कि कहीं ऐसा ना हो कि
वो पैसा लगाएं और वो डूब जाए। तो आखिर
ट्रेनिंग के पीछे का सच क्या है? इसी पर
बात करने के लिए आज हमारे साथ स्टूडियो
में खास मेहमान मौजूद हैं आईबीबीएम
प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अनुज कौर
जी जो काफी सालों से लोगों को सही राह बता
रहे हैं। तो चलिए स्वागत करते हैं उनका।
सर बहुत-बहुत स्वागत है आपका इस पॉडकास्ट
में।
थैंक यू अंजली जी। सर अच्छा अगर हम बात
करें शेयर बाजार के बारे में तो दो तरह के
लोग हैं जो एक वो हैं जो इसे जुआ मानते
हैं। दूसरे वो लोग हैं जो इसे क्विक मनी
यानी कि रातोंरात अमीर बनने का ख्वाब
देखते हैं इसके जरिए। तो इसके पीछे की
असली साइंस क्या है और एक एक्सपर्ट के तौर
पर आप कैसे इसे समझाना चाहेंगे? देखिए
आपने बोला दो टाइप के लोग हैं। एक जो
इसमें क्विक मनी की तरह और एक जुआ मानते
हैं। एक तीसरे टाइप के लोग भी हैं जो बहुत
प्रोफेशनल हैं और इसको एक सिस्टमैटिक
मार्केट की तरह मानते हैं। उसकी परसेंटेज
बहुत कम है। इसलिए आपका क्वेश्चन सही है
कि दो ही टाइप के लोग हैं जो एक रिच क्विक
स्कीम की तरह देखते हैं और एक जुए की तरह
देखते हैं। यहां पर सबसे ज्यादा
इंपॉर्टेंट है कि इसमें जो तीसरे टाइप के
लोग हैं जैसे सेबी भी हमेशा बोलता है कि
90 टू 95% ट्रेडर्स लॉस में रहते हैं। तो
केवल 5% लोग ऐसे हैं जो तीसरे टाइप के
कांसेप्ट में आते हैं।
तो मैं हमेशा मार्केट को एक सिस्टमैटिक
पैटर्न की तरह देखता हूं। जैसे हम किसी भी
इन्वेस्टमेंट्स की बात करें जैसे
रियलस्टेट इन्वेस्टमेंट्स, एफडी के
इन्वेस्टमेंट, गिल्ट के, बोंड्स के,
सिक्योरिटीज के। इसी तरह मार्केट भी एक
इन्वेस्टमेंट स्ट्रक्चर है। यह कोई जुए का
अड्डा नहीं है या गेट रिच क्विक स्कीम
नहीं है। हां, मार्केट आपको ल्योर करता है
और इसका बेनिफिट बहुत सारे सोशल मीडिया
एक्टिविस्ट उठाते हैं और जिससे जो बहुत
सारे व्यूअर्स होते हैं वो कई बार गलत
डायरेक्शन में चले जाते हैं। तो मार्केट
को मेरा देखने का नजरिया शुरू से एक ही
रहा है कि एक सिस्टमेटिक काम करने का
तरीका है। हां एक चीज मैं इस मार्केट में
जो मैं अधिकतर जगह बोलता हूं कि एक
बेनिफिट जो इस इंडस्ट्री में और
इंडस्ट्रीज के कंपैरिजन में आपको हमेशा
मिलता है कि इस इंडस्ट्री में अगर आपने
शुरू के दो चार साल बहुत अच्छे तरीके से
दे दिए तो बाद में आपके मल्टीपल इयर्स
बंपर होने वाले हैं क्योंकि कंपाउंडिंग का
एक बेनिफिट आपको मिलता है जो जनरली और
इंडस्ट्रीज में जल्दी से नहीं मिलता है।
सो दैट इज द बिगेस्ट एडवांटेज। कंपाउंडिंग
जैसे कि आप अगर
कंपाउंडिंग की अगर बात करें तो जब जैसे
फॉर एग्जांपल हम किसी स्ट्रेटजी पर काम कर
रहे हैं या हम किसी इन्वेस्टमेंट्स पर काम
कर रहे हैं तो धीरे-धीरे क्या होता है?
हमारी मनी कंपाउंड होती चली जाती है। जैसे
फॉर एग्जांपल हम एक ऑप्शन स्ट्रेटजी पर
काम कर रहे हैं। अब उस ऑप्शन स्ट्रेटजी पर
फॉर एग्जांपल आज हम 10 लॉट्स से हमने
स्टार्ट किया। धीरे-धीरे आप देखेंगे कि
धीरे-धीरे हमारे लॉट्स बढ़ते चले जाते
हैं। अगर हम किसी सिस्टमेटिक पावर पैकेट
सेटशन पर काम कर रहे हैं और प्रॉपर एक
सेटअप पर काम कर रहे हैं। ऑटोमेशन पर काम
कर रहे हैं तो धीरे-धीरे आप नोटिस करेंगे
कि आपके लॉट साइज ऑटोमेटिकली इनक्रीज होते
चले जाते हैं। तो अगर आज आप 10 लॉट से काम
कर रहे हैं तो आप देखेंगे कि आफ्टर वन ईयर
वो लॉट्स इनक्रीज हो गए। आफ्टर टू इयर्स
वो लॉट और इनक्रीज हो जाते हैं और
धीरे-धीरे आपकी कंपाउंडिंग होती चली जाती
है और रिस्क पैटर्न धीरे-धीरे कम होता चला
जाता है। रिवार्ड पैटर्न समय के साथ बढ़ता
चला जाता है। इसको हम बोलते हैं
कंपाउंडिंग पैटर्न। सो दैट इज द बिगेस्ट
एडवांटेज जो हमें इस इंडस्ट्री में देखने
के लिए मिलता है। हम
एक और चीज है जैसे कि
लोग लॉस एंड ये कह सकते हैं कि बिना सीखे
एंट्री एंड लॉस का सच समझना चाहते हैं।
जैसे कि डाटा कहता है कि जो फ्यूचर एंड
ऑप्शंस हैं उनमें आने वाले 90% से ज्यादा
रिटेल ट्रेडर्स ट्रेडर्स जो हैं वो नुकसान
उठाते हैं। और इसकी असल वजह क्या है कि
लोग बिना किसी फाइनेंशियल एजुकेशन के
सिर्फ सोशल मीडिया की रील्स और
स्क्रीनशॉट्स देकर मार्केट में कूद पड़ते
हैं।
देखिए इसको ऐसे देखते हैं जैसे आपने बोला
अभी हम उसी पे चर्चा कर रहे थे। 90 से 95%
लोग से भी आप बोल रहे हैं कि लगातार उसका
नोटिफिकेशन आता है कि लॉस में रहते हैं।
इस चीज को हम ऐसे समझते हैं। आप रैंडमली
किसी से भी बात कीजिएगा। मार्केट में जो
सबसे बड़ा मिथ है वो यह है कि यार सीधा
ट्रेडिंग अकाउंट खोल लो और मार्केट में
कूद पड़ो।
अब जैसे मैं नॉर्मल बात करता हूं। फॉर
एग्जांपल
मुझे स्विमिंग नहीं आती।
हां।
अब अगर मैं एकदम से मैं ये सोचूंगा यार
स्विमिंग सीखने के लिए क्या करना है? चलो
एक काम करता हूं। वाटर में डाइव मार देता
हूं।
हम
तो क्या मेरे डूबने का खतरा नहीं बढ़
जाएगा? ऑब्वियसली बढ़ जाएगा। क्योंकि
मैंने उसके लिए कोई टाइम नहीं दिया,
एनर्जी नहीं दी, स्किल डेवलप नहीं किया।
अब ऐसे ही अगर 100 लोगों को इमीडिएटली जंप
करा दिया जाए
डीप वाटर में जिन्होंने आज तक स्विमिंग
नहीं की तो ऑब्वियसली आपको नंबर ऑफ पीपल
जो पानी में डूब करके जिनकी डेथ हो सकती
है वो आपको ज्यादा देखने के लिए मिलेंगे
परसेंटेज बढ़ जाएगी ये एग्जांपल आप किसी
भी चीज का ले सकते हैं। मैंने स्विमिंग का
लिया आप ड्राइविंग का ले लो। जिसने आज तक
ड्राइविंग नहीं की आप उनको हाईवे पर 100
लोगों को कार की चाबी थमा दो। आप देखोगे
कि कितने लोग सक्सेसफुली पहुंच पाएंगे
अपने डेस्टिनेशन पर। शायद कोई भी नहीं।
सेम मार्केट है। मार्केट में लोग ना तो
स्किल डेवलप करते हैं, ना उसको टाइम दे
रहे हैं, ना एनर्जी दे रहे हैं, ना पैटर्न
दे रहे हैं। और उसके बाद ये आ जाता है कि
90% लोग लॉस में हैं, 95% लोग लॉस में
हैं। मेरा एक छोटा सा सवाल है जो 5% लोग
प्रॉफिट में हैं
वो प्रॉफिट में कैसे पहुंचे? क्या हमने
कभी उसे स्टडी करने के पैटर्न को समझा?
उन्होंने कितना टाइम दिया? कितनी एनर्जी
दी? आज बहुत सारे लोग हैं जो मेरे पास आते
हैं जो वेबिनार्स में आते हैं जो ट्रेनिंग
में आते हैं जो बात करते हैं आज वह
ब्यूरोक्रेट्स हैं पॉलिटिकल लीडर्स हैं
अपनी एमएसी कंपनीज में सीईओस हैं सीएक्सओस
हैं वाइस प्रेसिडेंट हैं मल्टीपल कंपनीज़
को लीड कर रहे हैं
क्या वो रातोंरात पहुंच गए वहां पे
ऐसा तो है नहीं कि अचानक से कोई उठा और
सीधा से सीएक्सओ के डेस्टिनेशन पे जाकर के
बैठ गया किसी कंपनी में ऑब्वियसली
उन्होंने मल्टीपल इयर्स दिए टाइम दिया,
एनर्जी दी, प्रोसेस समझा और अपने आप को उस
चीज में मास्टर किया।
हम
जब उन्होंने स्टेप बाय स्टेप उस प्रोसेस
को मास्टर किया तो वो एक डेस्टिनेशन पर
पहुंचे। अब सवाल यह आता है कि यार जब हम
मार्केट में काम करते हैं तो क्या हम वही
टाइम, वही एनर्जी, वही प्रोसेस, वही
सिस्टम देते हैं या कितने लोग ऐसे टाइम या
एनर्जी देते हैं? मुश्किल से मुश्किल 2
चार 5% और यही वह 5% लोग होते हैं जो
प्रॉफिट में होते हैं और 95% लोग लॉस में
होते हैं। जैसे हमने अभी बात की कि 95
सबसे पहले तो डेरिवेटिव्स क्या है ये अगर
ऑडियंस
हां देखिए डेरिवेटिव्स एक फ्यूचर एंड
ऑप्शंस का कॉम्बिनेशन होता है जो मार्केट
में हमें काम करने के लिए अपॉर्चुनिटी
देता है। डेरिवेटिव्स जो शुरू में ल्च किए
गए थे वो आपकी इक्विटी को मेनली हैच करने
के लिए ल्च किए गए थे। जिससे आपने जैसे
हमने अभी बात की कि हम आप किसी शेयर में
इन्वेस्ट करती हैं तो उसकी अगर आपके
अगेंस्ट आपकी पोजीशन जाती है तो आप उसको
हैच कर सकती हैं। उसके बाद धीरे-धीरे
डेरिवेटिव्स जो स्किलफुल ट्रेडर्स थे उनके
लिए पैसा कमाने का जरिया बना। जिसमें जो
अनस्किल्ड ट्रेडर्स या वही 90 95% लोग
जिनकी हम बात कर रहे थे उनके लिए वो कहीं
ना कहीं प्रॉब्लमैटिक एरिया भी रहा। जैसे
हम बात कर रहे हैं वो आज भी है। तो उस 5%
में अगर हमें आना है डेरिवेटिव ट्रेडिंग
के कांसेप्ट में जिसमें मेनली फ्यूचर एंड
ऑप्शंस की ट्रेडिंग होती है जिसमें मैं
मेनली ऑप्शंस की बात करता हूं तो हमें एक
और एडवांटेज मिलता है जो भी पैसा हम
इन्वेस्ट कर रहे हैं जैसे हमने अभी बात की
इंडेक्स फंड में या कहीं भी इसके अगेंस्ट
हमें काम करने के लिए डेरिवेटिव्स में
मार्जिन मिलता है और यह मार्जिन प्रॉपर
एक्सचेंज से आता है। सेबी से आता है। तो
अब अगला एडवांटेज क्या मिलता है? जैसे मैं
अपनी बात करता हूं। फॉर एग्जांपल अगर
मैंने लेट्स से ₹1 करोड़ इक्विटी में लगा
रखा है। उसके अगेंस्ट मुझे काम करने के
लिए डेरिवेटिव्स में मार्जिन अवेलेबल हुआ
है। अब होता क्या है? ₹1 करोड़ जो हमने
अभी बात की अपनी स्पीड से बढ़ रहा है 101%
पे क्योंकि वो तो इन्वेस्टेड है। उसके
अगेंस्ट काम करने के लिए अराउंड 10% का
हेयर कट मार के हमें मार्जिन मिल जाता है।
तो ₹1 करोड़ पे अराउंड 90 लाख का मार्जिन
मिल जाता है। उस 90 लाख पे अपने स्किल के
बेस पर हम डेरिवेटिव ट्रेडिंग्स में जिनकी
मास्टर यूज़ करके एडिशनल रिटर्न्स बना सकते
हैं। तो अब एक पर्सन है जो केवल इन्वेस्ट
कर रहा है। तो उसको तो 1 सीआर पे ₹12 लाख
मिला। एक ऐसा पर्सन जो इन्वेस्ट तो कर ही
रहा है। उसके अगेंस्ट जो एक्स्ट्रा
मार्जिन यूटिलाइज कर रहा है तो अपने
रिजल्ट्स को मल्टीप्लाई कर सकता है। वहां
पे मल्टीप्लायर का कांसेप्ट अप्लाई होता
है। और यही बिगेस्ट एडवांटेज होता है जो
एक इन्वेस्टर प्लस ट्रेडर दोनों के ब्लड
ग्रुप को मिलाकर के एक पावरफुल कांसेप्ट
बन जाता है। सो दैट इज़ द एडवांटेज ऑफ़
डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग। क्योंकि आपने
डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग समझाई है। लेकिन जब
मार्केट में स्क्रीन पर रेड और ग्रीन लाइट
दिखती है तो लोग परेशान होने लगते हैं। और
इस पूरे डर को या फिर लालच को कंट्रोल
करने की कोशिश करने के लिए क्या करना
चाहिए? देखिए रेड लाइट या ग्रीन लाइट जो
अभी आपने बोला जिसको हम कई बार प्रॉफिट
ग्रीन को जनरली प्रॉफिट या रेड को लॉस की
बात करते हैं। इसको समझने के लिए ऐसे
समझिएगा जब हम किसी भी कांसेप्ट पर काम
करते हैं हमें डर कब लगेगा हम
जब हमें लग रहा है कि यार मेरा कैपिटल
वाइप ऑफ हो जाएगा मेरे अगर हम किसी भी
ऑप्शन सेटअप पर काम कर रहे हैं
और हमें ये ऑलरेडी पता है कि उसमें मेरा
मैक्सिमम ड्रॉडाउन कितना हो सकता है तो
कहीं ना कहीं हमारा एक डर का फैक्टर खत्म
हो जाता है। जैसे एक एग्जांपल देता हूं।
मान लीजिए हमने किसी सिस्टम में ₹1 लाख का
किसी ऑप्शन स्ट्रेटजी में इन्वेस्टमेंट
किया। हम ऑटोमेशन पर काम कर रहे हैं। अब
हमें यह पता है कि पिछले 5 सालों में
इस ऑप्शन स्ट्रेटजी ने बैकवर्ड डाटा
टेस्टिंग और फॉरवर्ड डाटा टेस्टिंग के
हिसाब से मैक्सिमम ड्रॉडाउन हमारे फंड पे
5% का दिया है। आपको पता है पिछले 5 सालों
में। तो आपको यह पता है कि अगर मैंने ₹1
लाख उस ऑप्शन सेटअप में इन्वेस्ट किया है
ऑटोमेशन पर अगर मैं काम कर रही हूं या खुद
से कर रही हूं और अपने रूल्स डिसिप्लिन और
कंसिस्टेंसी को और प्रोसेस को आप फॉलो कर
रही हैं तो आपका ₹1 लाख मैक्सिमम 5% से ही
ड्रॉडाउन जा सकता है। आपको पता है। तो अगर
कोई चीज आपको पहले से पता है कि मेरा
कितना ड्रॉडाउन जा सकता है तो आपका फियर
फैक्टर वहां पे खत्म हो जाता है। वहां पे
आपका आंसर आता है रेड ज़ोन वाला क्योंकि
मुझे पहले से पता है कि यार ₹1,95,000 तक
जा सकता है। अगर आपकी कैपेसिटी 1 लाख को
95,000 देखने की नहीं है तो सिंपल है। आप
उस स्ट्रेटजी पर मत जाओ ना। पहले से बता
पता तो है आपको। मुझे पहले से पता है। फॉर
एग्जांपल किसी ने ₹1 लाख लगाए 5% का
ड्रॉडाउन हो सकता है कि भैया इसमें ₹0000
का ड्रॉडाउन आ सकता है आपका। आपको पता है
कि ₹0000 का ड्रॉडाउन आ सकता है।
अब आपको लगता है यार मैं ये ड्रॉडाउन नहीं
ले सकते। फॉर एनी रीजन। तो बहुत सिंपल सी
बात है। आप उस सेटअप पर काम मत करो।
अब बात करते हैं ग्रेट फैक्टर की। वो
सेटअप बता रहा है कि पिछले 5 साल में
लेट्स से उसने 36% का एनुअलाइज रिटर्न
दिया है। 36% मतलब 3% पर मंथ। अब वो सेटअप
₹1 लाख के इन्वेस्टमेंट पर ऑन एन एवरेज
₹0000 पर मंथ का एवरेज देता है। अब मुझे
रिवॉर्ड भी पता है इसका कितना है। मुझे
रिस्क फैक्टर भी पता है कितना है। तो एक
तरफ तो मेरा ग्रीड डेथ में आ गया। क्रिड
मर गया क्योंकि जरूरत ही नहीं है। मुझे
पता है कि इसका मैक्सिमम रिवॉर्ड ही इतना
है।
और मेरा जो फियर फैक्टर है लालच उसका भी
अब मुझे डर नहीं बचा क्योंकि मुझे पता है
कि मेरा मैक्सिमम ड्रॉडाउन मुझे पता है।
प्रॉब्लम यह है कि लोग किसी भी स्ट्रेटजी
पर उसके प्रॉफिट ज़ोन को देखकर कूदते हैं
ना कि लॉस ज़ोन को देख के। यह सबसे बड़ी
प्रॉब्लम है रिटेल ट्रेडर्स के साथ। अगर
किसी भी स्ट्रेटजी पर काम कर रहे हैं तो
सबसे ज्यादाेंट है उसके रेड जोोन को देख
और ग्रीड और फेयर डर और लालच ये दो ऐसी
चीजें हैं बाजार में जो बिगेस्ट डेवल ऑफ द
मार्केट है। ग्रीड एंड फेयर आर द बिगेस्ट
डेवल ऑफ द मार्केट। अगर कोई इन दोनों को
कंट्रोल करना सीख ले तो उससे बड़ा प्रोसेस
और सिस्टमैटिक ट्रेडर नहीं हो सकता।
और उसका क्या तरीका है? उसका बहुत सिंपल
सा तरीका है कि हम जिस भी सेटअप पर काम कर
रहे हैं, उसका मैक्सिमम ड्रॉडाउन क्लियर
होना चाहिए। उसका एंट्री क्लियर होना
चाहिए। एग्जिट क्लियर होनी चाहिए। वॉल्यूम
साइज क्लियर होना चाहिए। सिस्टम,
प्रोसीजर, प्रोसेस, ऑटोमेशन खुद से कर रहे
हैं तो ट्रेड एंट्री टाइम, एग्जिट टाइम।
अगर आपको एक चीज चीज क्लियर है तो जितने
भी सवाल आपने पूछे जो कि एक ट्रेडर के
दिमाग में या इन्वेस्टर के दिमाग में
हमेशा होते हैं उन सबका सॉलशन हमें मिल
जाता है।
अच्छा आजकल स्कैम भी बहुत चल रहा है।
टिप्स कल्चर भी बहुत चल रहा है। तो
टेलीग्राम और WhatsApp पर शॉर्टकट बताए
जाते हैं। ना सिर्फ टेलीग्राम Telegram और
WhatsApp पर मैं Instagram पे भी देखती
हूं और ले लूं और टिप्स ले लो पैसा डबल हो
जाएगा।
तो इस कल्चर से कैसे बचा जाए और इसकी
टिप्स आप कैसे देना चाहेंगे? देखिए मैं इस
चीज को हमेशा बोलता हूं। जब भी कोई
एडवाइज़री की बात करता है या बात करता है
कि यह वाली कॉल आज यहां से डबल हो जाएगी
ये हो जाएगी तो मैं हमेशा बोलता हूं कि
अगर कोई यह बोल रहा है ना कि यहां से
बाजार कहां जा सकता है
हम
तो या तो वो भगवान है या वो झूठ बोल रहा
है। दो ही चीजें हैं। मुझे बाजार में आज
अराउंड 20 इयर्स हो गए।
आप मुझसे पूछेंगे कि अगले 1 महीने बाजार
कहां जा सकता है? हम
आई कैन नॉट टेल यू सीरियसली मैं आज सबके
सामने ओपनली बोल रहा हूं जितने भी लोग देख
रहे हैं इसको मैं नहीं बता सकता अगले एक
महीने बाद बाजार कहां जा सकता है अगर मैं
बता रहा हूं तो या तो मैं फिर से रिपीट कर
रहा हूं या तो मैं झूठ बोल रहा हूं या मैं
भगवान हूं एंड दिस इज ट्रू फॉर एवरीवन। अब
सवाल ये आता है कि अगर मैं नहीं बता सकता
तो फिर मैं एक्सपर्ट किस बात का हूं?
या जो लोग दे क्लेम टू बी एक्सपर्ट वो किस
बात के हैं? देखिए एक्सपर्ट इज लाइ इन
सिस्टम इन प्रोसेस। जैसे मैं हमेशा बोलता
हूं एक रियल प्रोफेशनल ट्रेडर बाजार ऊपर
जाए, नीचे जाए, दाएं जाए, बाएं जाए, हमेशा
प्रॉफिटेबल ही निकलेगा। अगर मैं यह कह रहा
हूं कि बाजार कहीं भी जाए एंड ऑफ द मंथ,
एंड ऑफ द क्वार्टर, एंड ऑफ द ईयर मैं
प्रॉफिटेबल ही निकलूूंगा। इसका मतलब मुझे
बाजार पर भरोसा नहीं है। मुझे अपने सिस्टम
पर भरोसा है। अपने प्रोसेस पर भरोसा है।
अपने ट्रेडिंग पैटर्न पर भरोसा है। अपने
डिसिप्लिन पर भरोसा है। और अपने ऑटोमेशन
सिस्टम पर भरोसा है। मुझे बाजार पे कोई
भरोसा नहीं है। आई नेवर ट्रस्ट ऑन द
मार्केट। आई ट्रस्ट ऑन सिस्टम, प्रोसेस,
टेक्नोलॉजी एंड द इंफ्रास्ट्रक्चर व्हिच
वी हैव क्रिएटेड।
सो दिस इज़ वेरीेंट। तो कई लोग पूछते हैं
अगर आप नहीं बता सकते तो फिर आप लगातार
प्रॉफिटेबल कैसे हो? आई हैव टोल्ड यू द
रीज़। दैट इज द रीज़न आई एम प्रॉफिटेबल। अब
मंडे को बाजार कहां खुलेगा कौन बता सकता
है? कोई नहीं बता सकता है। हां, एक चीज
मैं बता रहा हूं। कहीं भी बाजार खुले
एंड ऑफ द डे अगर आप हमारी स्क्रीन देखेंगी
एंड ऑफ द और जो कि मैं वेरीिफाइड बाय
सेंसिबल अपना पीएंडएल भी शेयर करता हूं जो
सीधा एक्सचेंज से आता है। डायरेक्ट
कॉन्ट्रैक्ट नोट एक्सचेंज से आता है। वह
मैं लगातार शेयर करता हूं और लोग मुझसे
लगातार यह सवाल पूछते हैं कि कैसे पॉसिबल
है? दिस इज पॉसिबल ओनली बिकॉज़ ऑफ सिस्टम
एंड प्रोसेस। तो प्रोसेस इज द मोस्ट
ब्रूटल वेपन फॉर ए ट्रेडर। दैट इज वेरी
वेरीेंट।
तो जैसा कि आप सर ये स्ट्रेटजी की बात कर
रहे हैं। लेकिन आज के टाइम पे एआई लोग
बहुत ज्यादा यूज़ कर रहे हैं और एआई
स्ट्रेटजी बनाकर देता है। तो आपको क्या
लगता है कि जो एक्सपर्ट ट्रेडर्स हैं
मार्केट में उनको एआई रिप्लेस कर सकता है
आने वाले टाइम पे? देखिए इसके लिए मैं
आपसे एक सवाल पूछना चाहूंगा। पहले आपने
मुझसे एक सवाल पूछा मैं आपसे पूछूंगा एआई
किसने बनाया?
ह्यूमन ह्यूमन यस दिस इज द आंसर। ह्यूमन
ने बनाया। तो सबसे पहले तो मैं ये हर जगह
बोलता हूं कि कितना भी एआई हो जाए ह्यूमन
माइंड से बड़ा कोई नहीं हो सकता।
एआई आर मेड बाय ह्यूमन माइंड्स।
आज मेरे यहां पर जो ऑटोमेशन और बॉट चलते
हैं दे आर मेड बाय ह्यूमन माइंड्स। वो वो
करते हैं जो हमने बताया। एआई क्या करता
है? आप समझिएगा। जैसे फॉर एग्जांपल हमने
एक सिस्टम को जनरेट किया पूरा। हमने बताया
कि आपको 9:30 पर एंट्री लेनी है। 10:15 पर
फिर से चेक करना है। हर 15 मिनट में चेक
करना है। अगर यह कंडीशन होगी तो यह करना
है। यह कंडीशन होगी तो यह करना है। यहां
एंट्री कर देना है। एग्जिट कर देना। इतना
होगा तो वॉल्यूम बढ़ा देना। एंड सो ऑन।
एआई को हमने पूरा एक इंस्ट्रक्शन चार्ट
बना करके दे दिया। अब एआई को कुछ नहीं
पता। एआई उसको ब्लाइंडली फॉलो किए जा रहा
है
या सिस्टम या बॉट जिसकी हम बात कर रहे
हैं। तो एआई आर मेड बाय ह्यूमन माइंड्स।
दे कैन नेवर बी अबव ह्यूमन माइंड्स।
एआई से हां। अब एआई का बेनिफिट क्या है?
बहुत बड़ा बेनिफिट है। जैसे फॉर एग्जांपल
पूरे दिन किसी सिस्टम को ट्रैक करना। उस
पर बैठ के उसको देखना। सौदे को ट्रेड करने
की स्पीड फॉर एग्जांपल अगर मुझे कोई हास्य
सौदा मानना है तो ऑब्वियसली मैं पहले
कीबोर्ड उठाऊंगा फिर उसमें सेल बटन प्रेस
करूंगा फिर क्वांटिटी डालूंगा फिर सेल
मारूंगा इट विल टेक टाइम वि द हेल्प ऑफ एi
वि द हेल्प ऑफ बॉट्स इट बिकम्स वेरी इजी
स्मूथन हो जाता है प्रोसेस क्लीन हो जाता
है आप फ्री हो जाते हैं आप अपने और भी काम
कर सकते हैं दैट इज द बिगेस्ट एडवांटेज
लेकिन कोई भी एआई ह्यूमन माइंड्स को कभी
भी बीट नहीं कर सकता। इस बात को मैं आज भी
बोल रहा हूं। यह बात आज से 100 साल बाद भी
ट्रू होगी। एआई इज़ मेड बाय ह्यूमंस।
ह्यूमंस आर नॉट मेड बाय एआई। दिस इज वेरी
वेरीरीेंट।
हम अच्छा आपसे एक क्वेश्चन और क्योंकि कुछ
लोग ट्रेडिंग को फुल टाइम करियर के रूप
में जैसे चूज़ करना चाहते हैं। तो क्या
ट्रेडिंग फुल टाइम करियर के रूप में
रिलायबल होगा? और एक ट्रेडर को
कंसिस्टेंबली प्रॉफिटेबल होने में कितना
टाइम लगभग लग सकता है?
[नाक से की जाने वाली आवाज़] देखिए ये
वाला सवाल जो था ये सवाल आप मुझसे पिछले 5
साल 10 साल पहले पूछते तो वैलिड होता। अब
आज की अगर मैं बात करूं तो जैसे मेरे पास
बहुत सारे लोग आते हैं। वो कहते हैं कि सर
मैं 10 साल से जॉब में हूं। अब मैं जॉब
छोड़ के ट्रेडर बनना चाहता हूं
या मैं फुल टाइम करियर बनाना चाहता हूं।
सर मैं डॉक्टर हूं। पिछले 15 20 साल से
प्रैक्टिस कर रहा हूं। बहुत अच्छे से इनकम
वगैरह हो गई है सर। नाउ आई वांट टू लीव
माय। मैं हमेशा बोलता हूं हमें द बिगेस्ट
एडवांटेज ऑफ दिस इंडस्ट्री इज कि हमें
अपना प्रोफेशन छोड़ने की जरूरत नहीं है।
मैं अभी आपके साथ बैठा हूं यहां पे।
मेरा काम क्रिप्टोज़ में इस समय चल रहा है।
अब इसका मतलब यह नहीं है कि अगर मैं
ट्रेडर हूं फुल टाइम तो मैं दूसरा काम ना
करूं। हम
सो आपको अगर फुल टाइम इसमें काम करना है
तो द बिगेस्ट एडवांटेज इज कि आपको करंट
करियर के साथ कोई खिलवाड़ करने की जरूरत
नहीं है।
आप जो भी कर रहे हैं आप करते रहिए। आप
डॉक्टर हैं, इंजीनियर हैं, जॉब कर रहे
हैं। यू डू इट। द ट्रेडिंग इज लाइक अ
बिजनेस। यह आपकी एक एक्स्ट्रा इनकम है।
मैं हमेशा बोलता हूं आज के इस दौर में
मल्टीपल सोर्स ऑफ इनकम होना बहुत जरूरी
है।
आपको अपनी एक इनकम बंद करके दूसरी इनकम
स्टार्ट करनी है। दिस इज नॉट एडवाइबल।
अच्छा सर, ट्रेडिंग में बेस्ट स्ट्रेटजी
क्या होती है? चार्ट डाटा या फिर एनीथिंग
एल्स?
देखिए, चार्ट को देखना एक आर्ट है। यह मैं
हमेशा बोलता हूं। और इसमें चार्ट
इंपॉर्टेंट है, डेटा इंपॉर्टेंट है,
इंडिकेटर्स इंपॉर्टेंट हैं। कई लोग मुझसे
बात करते हैं। मैं हमेशा ये बोलता हूं कि
आपको कोई भी चीज दे दी जाए आपको उसको
चलाना आना बहुतेंट है। जैसे मैं आपसे
बोलता हूं एक जगह रखी है AK-47
हम
और एक जगह रखा है बिल्कुल देसी कट्टा।
आप कौन सा उठाएंगी? लड़ाई हुई तो आपको
लगेगा AK-47 उठा लेती हूं यार। यह बड़े
काम की चीज है।
हां। अब आप इमेजिन कीजिए आपको AK-47 उठा
तो लिया आपको चलानी नहीं आती और एक बंदा
है जिसके हाथ में देसी कट्टा है उसको
चलाना आता है
तो ऑब्वियसली वो लड़ाई में AK-47 वाले तक
को भी मार सकता है। तो कई लोग पूछते हैं
क्या चार्ट वो AK-47 है? डाटा AK-47 है?
कौन सा सबसे अच्छा हथियार है? और मैं
हमेशा बोलता हूं हथियार से ज्यादाेंट
हथियार चलाने वाला है। मतलब आप एज ए
ट्रेडर आपका स्किल क्या है वो सबसे
ज्यादाेंट है। सो यहां पर सबसे ज्यादा
जोेंट आता है वो आता है ओआई जिसको हम
बोलते हैं ओपन इंटरेस्ट। ओआई हमेशा जैसे
एक एग्जांपल लेते हैं। अभी बहुत सारे वॉर
की न्यूज़ चल रही थी बैक टू बैक। अभी भी
चल रही है। हालांकि अभी कवरेज थोड़ा सा कम
आ रहा है जो हम यूएस का और बाकी ये सब देख
रहे थे। तो आप इमेजिन कीजिए अचानक से
न्यूज़ आती है। जैसे अभी हम यहां बैठे
हैं। मान लो अभी कोई न्यूज़ आएगी हमारे
पास कि फलाना कंट्री ने फलाना पे बम मार
दिया, मिसाइल मार दी। मेरा एक छोटा सा
सवाल है। क्या वो अचानक से उठा के मार
देते हैं क्या कि यार बस बैठे हैं, चाय पी
रहे हैं। चलो फलाना कंट्री पे मिसाइल
नहीं। ऑब्वियसली उससे पहले उनकी मीटिंग
हुई होगी, प्लानिंग हुई होगी। आर्मी का
पूरा मैप बना होगा, प्लान बना होगा और इन
सारी चीजों को क्या बड़े ऑफिशियल्स ने ही
तो प्लान किया है तो ऑब्वियसली दे नो कि
एक पर्टिकुलर कंट्री पर अटैक होने वाला है
या कुछ होने वाला है तो क्या वो मार्केट
में पोजीशन नहीं लेंगे? ऑब्वियसली वो अपनी
पोजीशन पहले लेंगे और वो पोजीशन आपको कहां
पर दिखेगी? वो पोजीशन आपको दिखती है ओपन
इंटरेस्ट में। सो अगर आप जानते हैं कि ओपन
इंटरेस्ट को राइट रीडिंग करके कैसे काम
किया जाए तो ऑब्वियसली हम इन बिग प्लेयर्स
को कहीं ना कहीं ट्रैक कर सकते हैं। उस
टॉपिक पर जाने के लिए मुझे थोड़ा सा
ज्यादा टाइम चाहिए होगा तो उसको हम कभी और
चर्चा करेंगे। बट ओपन इंटरेस्ट इज द मेन
सोर्स हाउ टू रीड इट कि बिग प्लेयर्स कहां
पर पोजीशन बना रहे हैं और उसी चीज को हम
अपने ऑटोमेशन में कई बार मैक्सिमम तरीके
से यूटिलाइज भी करते हैं।
सर एक आम इंसान को ट्रेडिंग सीखने में
कितना समय लग सकता है और सबसे जरूरी चीज
क्या जॉब के साथ-साथ वो ट्रेडिंग सीख सकता
है? क्या ये अब जैसे कि आजकल ऑनलाइन
क्लासेस चली है तो ऑनलाइन क्लास के जरिए
समझ सकता है या फिर से कहीं किसी क्लास
में फिजिकली जाना जरूरी है?
देखिए मेरा यह मानना है आजकल ग्लोबल पूरा
जमाना हो गया है और फिजिकल जाने की कोई
बहुत ज्यादा नीड नहीं है। आजकल बहुत सारी
चीजें हमारे पास अवेलेबल हो गई हैं। हां,
यह सबसे ज्यादाेंट है कि हमें राइट ब्लैंड
ऑफ नॉलेज मिले। दिस इज वेरी वेरीेंट।
क्योंकि आज जब हम मैं बोल दूं YouTube से
सीख लो आप फलाना इंस्टट्यूट से सीख लो ये
कर लो वो कर लो तो मल्टीपल सोर्सेज हैं
आजकल लेकिन राइट सोर्स क्या है उसको
पहचानना बहुत जरूरी है क्योंकि हमें राइट
गुरु का मिलना बहुत ज्यादा जरूरी है उसमें
तभी आपको राइट टाइम लगेगा सीखने के लिए तो
उसके लिए सबसे ज्यादाेंट है मैं हमेशा
बोलता हूं अगर आप किसी को भी चूज़ कर रहे
हैं अपने लर्निंग कर्व के लिए चाहे वह कोई
सा भी YouTube चैनल हो कोई भी सोशल मीडिया
हो ऑफलाइन हो ऑनलाइन हो जो भी मोड आप पसंद
कर रहे हैं अपनी फिजिबिलिटी के अकॉर्डिंग।
सबसे ज्यादा आपको यह चूज़ करना है कि जो भी
आपके मेंटोर हो वह ट्रेनर ना हो, ट्रेडर
हो। दिस इज वेरी वेरीेंट। अगेन आई एम
रिपीटिंग देयर आर लॉट ऑफ पीपल इन द
मार्केट हु आर ट्रेनर्स नॉट ट्रेडर्स।
सो राइट ट्रेडर्स
कैन ओनली ट्रेन योर माइंड टू बी
प्रॉफिटेबल ट्रेडर देन द ट्रेनर। ट्रेडर
ट्रेनर हो सकते हैं। लेकिन ट्रेनर ट्रेडर
होगा। दिस इज नॉट नेसेसरी।
सर जो नए लोग मार्केट में आ रहे हैं वो
सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं कि आते ही
उनका पैसा डूब जाता है।
देखिए सबसे बड़ा जो होता है अंजलि जी
इसमें वो यही है कि
बिगेस्ट प्रॉब्लम पता है क्या है हमारे
यहां? ये है कि
छोटे पैसे से बड़ा पैसा बनाना। जैसे फॉर
एग्जांपल ₹1 लाख लगा के रोज के ₹10,000
कैसे आ सकते हैं? मेरे पास कई क्वेरी भी
आती है ऐसी सर मैं ₹00 लगा सकता हूं। रोज
के ₹5,000 आ सकते हैं क्या? अब आप मुझे
बताओ 22 दिन बाजार खुलता है अराउंड 22 डेज
हमारा इंडियन मार्केट। अब किसी ने ₹1 लाख
लगाए और रोज के ₹10,000 बना रहे हो तो
मतलब आप ₹1 लाख पे ₹2,20,000 बना रहे हो।
हम
व्हिच इज़ अ रिटर्न ऑफ़ आप समझो 200 300%
अगर इतना आसान होता 200% रिटर्न 300%
रिटर्न हर महीने बनाना तो क्या सारे बैंक
बेवकूफ हैं क्या? उनके पास तो कितने
मल्टीपल करोड़ ऑफ मनी है।
हम
सो ये सबसे बड़ी प्रॉब्लम है एक न्यू
ट्रेडर्स के साथ। उन्हें कम पैसे पर
ज्यादा पैसा बनाना होता है। और इसी का
फायदा जो आपने बोला यह सारे एडवाइजर यह
सारे टेलीग्राम ग्रुप वाले ये सारे
एडवाइज़री देने वाले बहुत सारे सोशल मीडिया
वाले इसी का फायदा उठाते हैं। आप बहुत
सारे थंबनेल भी देखेंगी जिस पे लिखा होगा
₹1 लाख से रोज के ₹10,000 कैसे बनाए?
मैंने अपने अकाउंट को ₹1 लाख से 1 करोड़
का कैसे बनाया? आप देखेंगे।
भाई साहब अगर आप अपने अकाउंट को 1 लाख का
एक करोड़ का बना सकते हो तो आपको सोशल
मीडिया पर आकर बताने की जरूरत नहीं है।
अगर आप 1 लाख का एक करोड़ बना सकते हो तो
10 लाख के 10 करोड़ भी बना सकते हो
और आप 100 लाख के 1 करोड़ के 100 करोड़ भी
बना सकते हो। सो यह सारी चीजें ल्योर है
और इसमें मैं सोशल मीडिया को सबसे बड़ा एक
प्रॉब्लमेटिक एरिया भी मानता हूं। जैसे हर
चीज की दो धारी तलवार होती है।
हम
एक बेनिफिट भी है। जो अच्छे लोग हैं उनसे
आपको बेनिफिट मिल सकता है। कई लोग ऐसे हैं
जो उसको गलत दिशा में ले जाते हैं। और यही
एक बिगेस्ट रीजन है कि इस इंडस्ट्री को एक
जुए के अड्डे की तरह देखा जाता है। अब नया
बंदा है माइंड इतना मैच्योर नहीं है। उसको
लग रहा है यार ₹1 लाख लगा के रोज के
₹10,000 बन सकते हैं। तो क्या मैं बेवकूफ
हूं? जो 40-500 की नौकरी पे जा रहा है
उसको ऐसा लगता है।
हम
अगर रोज के 1 लाख लगा के 10,000 आ सकते
हैं। तो अब अच्छा ये लोग क्या करते हैं?
किसी एक दिन काम किया मान लो उस दिन
10,000 आ गए।
हां
उस दिन का बता देगा बताती।
और हमारे यहां पे एक सबसे बड़ी प्रॉब्लम
चल गई है एक्सेल जिसको मैं सबसे बड़ी
प्रॉब्लम एक्सेल पे सब कैलकुलेट कर लेते
हैं। एक्सेल पर हर कोई अमीर हो रहा है
आजकल कि भैया ₹10,000 महीने की एसआईपी कर
लो। 25 साल में तुम करोड़पति हो जाओगे। 10
साल में तुम 100 करोड़ ले जाओगे। वो
एक्सेल एक्सेल का खेल ना बना करके सोशल
मीडिया पे इतना बड़ा बना दिया गया है।
उसके पीछे का रीजन अब जैसे मैं एक
एग्जांपल देता हूं। अभी एक न्यूज़ आई।
उसमें यह आया कि यह मुझे लेकर के आई थी कि
अनुज जी ने 1 महीने में 2 करोड़ का
प्रॉफिट बनाया।
उस पे कमेंट आ रहे हैं भर-भर के। और इतना
ओपनली कोई नहीं बोलेगा। मैं अपने बारे में
बोल रहा हूं।
सर आप शेयर बाजार के भगवान हो। आपने यह कर
दिया, आपने वह कर दिया, फलाना।
किसी भी इंसान ने यह नहीं पूछा कि उस एक
महीने में ₹ करोड़ बनाने के लिए मैंने फंड
साइज कितना यूज़ किया? क्योंकि हर किसी की
नजर ₹ करोड़ है। एक महीने में ₹ करोड़। एक
महीने में ₹ करोड़ आ।
मैंने उस 2 करोड़ को बनाने के लिए एक
महीने में आपको पता है कितना फंड यूज़
किया? 100 करोड़ का। तो मैंने कितना
रिटर्न बनाया? केवल 2% का। 100 करोड़ पर 2
करोड़ केवल 2% है।
कोई बेवकूफ आदमी सॉरी फॉर माय लैंग्वेज।
यह नहीं पूछ रहा कि आपने कितना फंड यूज़
किया। हर किसी की नजर इस चीज पे ₹ करोड़ ₹
करोड़ आ गए। एक महीने में ₹ करोड़ आ गए।
फिर मैंने बताया पब्लिकली आके
कि यहां पर फंड साइज बड़ा यूज किया गया
है। बट जो लोग गलत हैं वो इसका अलग से
फायदा उठाते हैं। वह यह बताते हैं ₹2
करोड़ एक दिन में आ गया। देख लो भैया ₹2
करोड़ आ गया। उसके पीछे कितना समय लगाया?
कितने साल हो गए हैं उस चीज को मास्टर
करते हुए। कितनी एनर्जी हो गई है? कितना
टाइम लगा है? उसकी कोई बात नहीं करता।
कितना पैसा आ गया? कितना पैसा आ गया? जैसे
अभी अंबानी जी की बात करूं। उन्होंने अपने
बेटे की शादी में
कई मल्टीपल सीआर्स में खर्चा किया। सबकी
यही चर्चा है। आपको पता है वो उनकी टोटल
वेल्थ का कितने परसेंट है? वो उनकी टोटल
वेल्थ का आधा परसेंट भी नहीं है जो
उन्होंने खर्चा किया है।
हम
लेकिन हमें वो फिगर बहुत बड़ी लग रही है।
तो अगर आप किसी भी सोशल मीडिया पर किसी भी
चीज को देख रहे हैं। मैं ये सारे व्यूअर्स
को बोलना चाहता हूं। उससे मोटिवेट ना हो।
उसके पीछे की बहुत सारी चीजों पर लर्निंग
अच्छा है। उसमें कितना पैसा लगा, कितना
टाइम उसने दिया, कितनी एनर्जी उसने दी,
क्या सिस्टम है? क्या प्रोसेस है? हमेशा
एक लाइन को अच्छा इसमें न्यूज़पेपर्स वाले
भी गेम प्ले करते हैं। सिर्फ यह छापेंगे
ट्रेडर ने बनाया एक दिन में 2 करोड़ का
प्रॉफिट।
उसके पीछे का क्या सच है? दे नेवर राइट
इट। सो ये व्यूअर्स पर हमेशा डिपेंड करता
है कि वो रीड बिटवीन द लाइन कर सके, चीजों
को समझ सकें।
सर, आपकी ट्रेडिंग का सबसे बड़ा नियम क्या
है जो आप खुद कभी नहीं तोड़ना चाहते?
देखिए मैंने अपनी टीम को भी बता रखा है।
मेरा सबसे बड़ा नियम यही है कि प्रिंसिपल
अमाउंट की सेफ्टी है। अगर आपने अपने
प्रिंसिपल अमाउंट को बचा लिया ना
हम
बाजार कुछ भी करता रहे
यू विल बी प्रॉफिटेबल ऑलवेज। सेफ्टी ऑफ
माय प्रिंसिपल अमाउंट इज द बिगेस्ट रूल ऑफ
माय ट्रेडिंग। सो माय रूल नंबर वन इज़ आई
हैव टू रूल्स। माय रूल नंबर वन सेस नेवर
एवर लूज योर प्रिंसिपल अमाउंट।
एंड माय रूल नंबर टू इज नेवर एवर फॉरगेट
रूल नंबर वन।
सो दैट इज द मेन थिंग व्हिच आई ऑलवेज फोकस
ऑन। सर जैसे कि अभी गोल्ड की हम बात कर
लेते हैं। शादी भी आ रही है, शादियों का
सीजन भी आ रहा है और दिवाली भी आ रही है।
तो आम लोगों को गोल्ड में इन्वेस्ट करना
चाहिए या फिर नहीं करना चाहिए?
देखिए गोल्ड का सीएजीआर की फॉर्म में अगर
आप देखेंगे तो गोल्ड का सीएजीआर नॉर्मली
10 टू 14% के बीच में ऑफर करता है। पिछले
चार से 5 साल में जो गोल्ड का सीएजीआर रहा
है, वह अबव 15% रहा है। उसके दो-तीन रीज़न
रहे। पहला वॉर की सिचुएशन बहुत ज्यादा बनी
रही है और अनसर्टेनिटी बहुत ज्यादा रही
है। जब भी हमारे पूरे इकोनॉमिक सिस्टम में
एक अनसर्टेनिटी जब तक बनी रहेगी तब तक
गोल्ड के प्राइसेस पर लगातार नजर बनी
रहेगी। अगर मैं बात करूं अगले 2 से 4 साल
के सिनेरियो की अगर इन्वेस्टर की बात करें
तो गोल्ड में बहुत ज्यादा मूवमेंट हमें
देखने के लिए नहीं मिलने वाला है। हां जो
उसका सीएजीआर बना रहता है अराउंड जैसा कि
मैंने बोला 10-12% के आसपास वो एक मूवमेंट
देखने के लिए मिल सकता है। हां, एक केस
में हमें मूवमेंट देखने के लिए मिल सकते
हैं। अगर वॉर की सिचुएशन फिर से कहीं भी
किसी कंट्रीज के बीच में अराइज़ होती है या
कुछ भी ग्लोबल अनसर्टेनिटी हमें देखने के
लिए मिलती है, तो गोल्ड के प्राइसेस
रैपिडली जंप ऑफ कर सकते हैं। लेकिन अगर हम
एक नॉर्मल इकॉनमी की बात करें सो अगले दो
से चार साल में गोल्ड जिस पेज से चलता है
उसी पेस से चलेगा। कोई स्पेशल उसमें कुछ
होने वाला नहीं है। हालांकि अगर गोल्ड के
लेवल्स की बात करें तो गोल्ड के लेवल्स को
अगले 2 से 4 साल में मैं ₹1,20,000 से
₹1,70,000 तक की रेंज में देखता हूं।
मतलब इन्वेस्ट कर सकते हैं या फिर नहीं कर
सकते?
अ अगर आप मुझसे बात करेंगे इन्वेस्टमेंट
की तो यस गोल्ड का इन्वेस्टमेंट इज़ ऑलवेज
गुड। अगर हम फाइव इयर्स के ओरिजिन के साथ
देखते हैं तो इट इज़ गुड। अगर आप शॉर्ट
टर्म में ये सोच रहे हैं कि अभी पैसा
लगाएंगे तो जैसे गोल्ड के साथ पिछले जैसे
गोल्ड बिहेव्स लाइक ए पेनी स्टॉक इन लास्ट
टू थ्री इयर्स इस तरीके से ऐसा कुछ होने
वाला है तो कुछ नहीं अंटिल एंड अनलेस कोई
ग्लोबल अनसर्टेनिटी देखने के लिए मिलती है
तो तो रैपिडली राइज अप हो सकता है वरना
गोल्ड जिस तरीके से मूव करता है उसी तरीके
से मूव करेगा
सर अब रैपिड फायर कर लेते हैं। कुछ रैपिड
फायर क्वेश्चंस हैं। ऑप्शन बाइंग और ऑप्शन
सेलिंग
हम् ऑप्शन सेल
डिसिप्लिन और स्ट्रेटजी
डिसिप्लिन
निफ़ी और बैंक निफ्टी
निफ्टी
फियर और ग्रीड बिगर मार्केट एनिमी
ग्रीड
कंसिस्टेंसी और बिग रिटर्न्स
कंसिस्टेंसी ऑब्वियसली
मैनुअल ट्रेडिंग और एल्गो ट्रेडिंग
एल्गो
वन हैबिट एव्री ट्रेडर मस्ट डेवलप
फॉलो द रूल डिसिप्लिन सिस्टम पैटर्न एंड ए
प्रूवन बैक टेस्टेड एंड फॉरवर्ड टेस्टेड
डेटा सेटअप।
वन इमोशन दैट डिस्ट्रॉय ट्रेडर्स द मोस्ट
ग्रीड एंड फेयर।
ग्रीड एंड फेयर। योर बिगेस्ट स्ट्रेंथ एज
अ ट्रेडर।
प्रोसेस।
वन वर्ड टू डिस्क्राइब योर ट्रेडिंग
स्टाइल।
सिस्टमैटिक एंड डिसिप्लिन ट्रेडर। सर
लास्ट एंड लीस्ट अगर आप कोई गोल्डन मंत्र
देना चाहें इस उतार-चढ़ाव भरे मार्केट में
टिके रहने के लिए।
गोल्डन मंत्रा की अगर मैं बात करूं तो मैं
एक ही बात बोलूंगा। आप कुछ भी कर रहे हैं
लाइफ में इट्स नॉट अबाउट मार्केट।
उसको सोचकर समझकर इन्वेस्ट कर जो एनएससी
भी बोलती है। सेम हियर। सो सीखकर
सोचकर समझकर ही आप काम कीजिएगा। अपने
प्रिंसिपल अमाउंट की सेफ्टी पर हमेशा
ध्यान दीजिएगा। इट्स ए हार्ड एंड मनी और
हमेशा कोशिश कीजिएगा कि आप इनफ्लेशन को
बीट कर सकें। इनफ्लेशन नॉर्मली 5 टू 7%
हमारी इकॉनमी में रहता है। अगर हम
इनफ्लेशन को बीट नहीं कर पाते अपने
इन्वेस्टमेंट की हेल्प से तो दैट इज नॉट अ
गुड इन्वेस्टमेंट।
चलिए बहुत-बहुत शुक्रिया सर। आप यहां पर
आए और आपने तमाम जानकारी हमारे साथ साझा
की और उम्मीद करते हैं कि आपको यह पडकास्ट
अच्छा लगा होगा और अगर आपको इस पॉडकास्ट
को लेकर अपनी कोई राय देनी है तो कमेंट
बॉक्स खुला हुआ है आपके लिए। कमेंट सेक्शन
में अपनी राय जरूर लिखिएगा और इस वीडियो
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भूलिए। नमस्कार।
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