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Yakshini ki kahani,Episode no 5

17:12EnglishTranscribed Jul 27, 2026
0:00

[संगीत]

0:07

युग डरते हुए अभिमन्यु से कहता है यार

0:10

तूने आवाज सुनी अभिमन्यु हैरानी के साथ

0:14

पूछता है कैसी आवाज यार लड़की की आवाज

0:18

अभिमन्यु चिढ़ते हुए कहता है यार ये तूने

0:21

क्या जब से लड़की की आवाज लगा रखा है जब

0:24

से यहां पर आया है कह रहा है लड़की की

0:26

आवाज लड़की की आवाज किस लड़की की आवाज की

0:29

बात कर रहा है तू यार। पता नहीं पर सच में

0:32

मैंने दो-तीन बार किसी लड़की की आवाज

0:34

सुनी। लगता है तेरे कान कुछ ज्यादा ही बज

0:37

रहे हैं। यह बता तू रास्ते भर कान में

0:39

हेडफोन डालकर गाने सुनते हुए आया है ना?

0:42

हां। पर यह बात तुझे कैसे पता? यार तभी तो

0:46

तुझे आवाज सुनाई दे रही है। होता क्या है

0:48

ना जब भी हम 3-4 घंटे तक लगातार गाने

0:51

सुनते [संगीत] हैं तो उनके बोल हमें याद

0:53

रह जाते हैं और वही बोल हमारे कानों में

0:56

गूंजने लग जाते हैं। यार पर

0:59

युग कुछ बोल पाता उससे पहले ही अभिमन्यु

1:02

कहता है परवर छोड़ जब से कह रहा था

1:04

ग्रेवयार्ड कोठी जाना है और जब ताला खुल

1:07

गया तो बाहर खड़ा हुआ है। कोई शुभ मुहूर्त

1:10

का इंतजार कर रहा है क्या या फिर किसी का

1:12

इंतजार कर रहा है कि कोई आएगा और तेरा

1:14

ग्रेव प्रवेश करवाएगा। युग अभिमन्यु की

1:17

बात का कुछ जवाब नहीं देता है और कोठी के

1:20

अंदर घुस जाता है। कोठी के अंदर लाइट नहीं

1:23

थी। हर तरफ अंधेरा ही अंधेरा था। इतना

1:26

अंधेरा कि कहीं कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

1:28

अभिमन्यु कोठी के अंदर घुसते हुए कहता है,

1:32

यार यहां पर तो बहुत अंधेरा है। [संगीत]

1:34

ऐसा लग रहा है जैसे किसी अंधेर नगरी में आ

1:37

गए हो। युग अपने मोबाइल का टॉर्च ऑन कर

1:39

लेता है। अपना बचपन कोठी में ही गुजारने

1:42

के कारण युग को पता था कि लाइट का स्विच

1:45

कहां पर है। कुछ ही देर में युग को लाइट

1:47

का स्विच मिल जाता है और वो जैसे ही स्विच

1:50

दबाता है कोठी के अंदर चारों तरफ उजाला हो

1:53

जाता है। कोठी रोशनी से जगमगा उठती है।

1:56

अभिमन्यु हैलोजन के बल्ब को देखते हुए

1:58

कहता है यार तूने एक चीज नोटिस की? युग

2:01

हैरानी के साथ पूछता है। कौन सी चीज? यही

2:05

यार कि यह कोठी 13 सालों से बंद थी। पर तू

2:08

खुद देख लाइट का कनेक्शन अभी तक काम कर

2:11

रहा है। ऐसा कैसे हो सकता है? यू कुछ

2:14

सोचते हुए कहता है हो सकता है लाइट का

2:16

कनेक्शन बिजली विभाग वालों ने काटा ही ना

2:18

हो। अभिमन्यु फटाक से पूछता है और वो

2:21

क्यों? क्योंकि उनके मन में भी यक्षिणी का

2:24

खौफ होगा और वह यहां पर आने से डरते

2:26

होंगे। इसीलिए उन्होंने लाइट का कनेक्शन

2:28

काटा नहीं होगा। अभिमन्यु युग की बात का

2:31

कुछ जवाब नहीं देता क्योंकि उसे युग की

2:33

बात बिल्कुल ठीक लगी थी। वह कोठी को देखने

2:36

लग जाता है। 13 सालों से कोठी बंद होने के

2:39

कारण हर जगह धूल ही धूल थी। मकड़ी ने कई

2:42

सारे जाारे बनाकर रखे हुए थे। कोठी के

2:45

अंदर दो बड़े से गुंबद बने हुए थे जो कोठी

2:48

की खूबसूरती को चार चांद लगा रहे थे। कोठी

2:51

की सीढ़ियां संगमरमर से बनी हुई थी। हॉल

2:54

में बर्माटिक और बेल्जियम के बड़े-बड़े

2:56

झूमर थे। कोठी का फर्नीचर मोहगनी की लकड़ी

3:00

का था। दीवारों पर कई कलाकृतियां बनी हुई

3:03

थी जिसकी सजावट के लिए तलवारें, रस्सी,

3:06

कुल्हाड़ी अलग-अलग चीजें टंगी हुई थी जो

3:09

काफी पुराने जमाने की थी। उन पुरानी चीजों

3:12

को देखकर ऐसा लगता था कि हर एक चीज के

3:14

पीछे कोई ना कोई कहानी छिपी हुई थी।

3:17

अभिमन्यु कोठी के चारों तरफ अपनी नजरें

3:19

घुमाते हुए कहता है, यार यह ग्रेवयार्ड

3:22

कोठी अंदर से तो बहुत शानदार है। इतनी

3:25

पुरानी इमारत है पर देखकर ऐसा लगता है कि

3:28

जैसे अभी एकद साल पहले ही बनाई गई हो। कुछ

3:31

भी बोलो। यह अंग्रेज लोग काम एकदम बढ़िया

3:34

करते हैं। इतना बढ़िया कि सालों साल तक

3:36

चले। मेरे तो समझ में नहीं आ रहा कि तेरे

3:39

रिश्तेदारों ने इतनी अच्छी कोठी इतने

3:41

सालों से बंद क्यों रखी थी। युग अभिमन्यु

3:44

के सवाल का कुछ जवाब नहीं देता है। वो गौर

3:46

से कोठी का कोना कोना देख रहा था। उसे

3:49

देखकर ऐसा लग रहा था कि कोठी को देखकर

3:52

उसके बचपन की यादें ताजा हो गई हो।

3:54

अभिमन्यु अपनी बात को आगे जारी रखते हुए

3:56

कहता है यार इस कोठी की भी बड़ी बेकार

3:59

किस्मत है। एकद हफ्ते बाद अपने वेकेशन

4:02

खत्म करके तू यहां से चला जाएगा और फिर से

4:05

इतनी प्यारी कोठी बंद हो जाएगी। मैं कहां

4:08

जाऊंगा? अभिमन्यु फटाक से कहता है अपने

4:11

शहर बेंगलुरु जहां पर तू रहता है और कहां

4:13

पर जाएगा तू यहां पर अपनी छुट्टियां ही

4:16

बिताने आया है ना शहर से मन भर गया होगा

4:18

तो युग उदास चेहरा बनाते हुए कहता है

4:21

मैंने बोर छोड़ दिया है और अब मैं कहीं

4:24

नहीं जाऊंगा हमेशा यहीं पर रहूंगा

4:26

अभिमन्यु अपनी आंखें फाड़ते हुए कहता है

4:29

क्या कहा तूने बोर छोड़ दिया है पर क्यों

4:33

तू तो बोर में सेटल हो गया था ना अंकल जी

4:36

के शांत हो जाने के बाद 13 सालों से वहीं

4:38

पर तो रह रहा है तू। तो अब ऐसा क्या हो

4:41

गया कि तू अपना सब कुछ छोड़कर वापस अपने

4:43

गांव आ गया? तुझे पता है ना गांव की

4:45

जिंदगी शहर की जिंदगी से बहुत अलग होती है

4:48

और यह बंगलामुंडा गांव है। यहां पर

4:50

नेसेसरी चीज भी मुश्किल से मिलती है। हां,

4:53

पता है मुझे पर मैंने फैसला कर लिया है।

4:55

चाहे कुछ भी हो जाए पर अब मैं हमेशा यहीं

4:58

पर रहूंगा। पर क्यों? आखिर शहर में तेरे

5:02

साथ ऐसा क्या हुआ कि तू अपना सब कुछ

5:04

छोड़कर गांव में रहने आ गया? [संगीत]

5:10

यार अभिमन्यु देख अभी ना मेरा तुझे कुछ भी

5:13

बताने का बिल्कुल मूड नहीं है। मेरा सिर

5:16

बहुत तेज दर्द हो रहा है। लंबा सफर करने

5:18

के कारण नींद भी बहुत आ रही है इसलिए सोने

5:21

दे मुझे। मैं तुझे सुबह सब कुछ बताता हूं

5:23

ना। अभिमन्यु युग की हालत समझ जाता है और

5:26

उदास चेहरा बनाते हुए कहता है, [संगीत]

5:28

हां, चल ठीक है। पर तू सोएगा कहां? कोठी

5:31

में तो सब जगह धूल जमी हुई है। इतनी धूल

5:34

पर सोएगा क्या?

5:35

[संगीत]

5:35

अभिमन्यु ने डाइनिंग टेबल पर फूंक मारते

5:37

हुए कहा। युग अपने आसपास देखते हुए कहता

5:40

है, लगता है कल सुबह उठकर सबसे पहले सफाई

5:43

करनी पड़ेगी। खैर, रात गुजारने के लिए

5:46

मेरे बैग में दो ब्लैंकेट रखे हुए हैं। एक

5:49

तू ले ले, एक मैं ले लेता हूं। वही बिछाकर

5:52

सो जाएंगे। फिर सुबह कुछ ना कुछ तो कर ही

5:54

लेंगे। हां, ठीक है। युग अपने बैग में से

5:57

ब्लैंकेट निकालता है और दोनों उसे बिछाकर

6:00

उस पर सो जाते हैं। [संगीत] चांदनी रात थी

6:03

और युग एक लड़की के साथ नदी के किनारे

6:06

बैठा हुआ था। छोटी-छोटी लहरें बार-बार उन

6:09

दोनों के पैरों को स्पर्श कर रही थी। युग

6:11

का चेहरा तो साफ दिख रहा था। पर लड़की का

6:15

चेहरा क्लियर नहीं दिख रहा था। उस लड़की

6:18

ने काले रंग की साड़ी पहनी हुई थी। उसने

6:21

अपना सिर युग के कंधों पर रखा हुआ था।

6:23

दोनों ही एक दूसरे से चिपक कर बैठे हुए

6:26

थे। वो लड़की आसमान में दिख रहे चांद को

6:29

देखते हुए कहती है, एक बात पूछूं आपसे?

6:33

युग प्यार से कहता है, हां, पूछो ना।

6:36

[संगीत] इसमें इतना हिचकिचाने वाली क्या

6:38

बात है? आप मुझे आप मुझे भूलोगे तो नहीं

6:41

ना? युग बड़े प्यार से बोलता है, तुम

6:44

भूलने वाली चीज थोड़ी हो जो मैं तुम्हें

6:46

भूलूंगा। तुम तो वो हो जिसे मैं जिंदगी भर

6:49

अपने पास रखना चाहता हूं। अपनी बाहों में

6:52

भरकर। इतना कहकर युग उस लड़की की कमर पर

6:55

हाथ रखता है और उसे अपने सीने से सटा लेता

6:58

है। वो लड़की युग से दूर हटते हुए कहती है

7:02

कोई बातें बनाना तो आपसे सीखे। अच्छा चलिए

7:05

यह बताइए मैं आपके लिए क्या हूं? क्या हूं

7:07

मतलब? मतलब यह कि मैं आपकी जिंदगी में

7:10

क्या अहमियत रखती हूं? युग उस लड़की से

7:12

मजाक करते हुए कहता है, तुम कुछ अहमियत

7:15

नहीं रखती मेरी जिंदगी में। मेरी जिंदगी

7:18

मुझसे है ना कि तुमसे? युग का जवाब सुनकर

7:21

वो लड़की नाराज हो जाती है और मुंह फुलाते

7:24

हुए [संगीत] कहती है, मतलब इतने दिनों से

7:26

जो कुछ आप मेरे साथ कर रहे हैं, वह सब

7:28

दिखावा है। सब लड़के ना एक जैसे होते हैं।

7:31

उन्हें लड़कियों से बस एक ही चीज चाहिए

7:33

होती है और वो है उनका जिस्म। जहां आप

7:36

लोगों का मतलब निकलता है, आप लोग हमसे

7:38

मुंह फेर लेते हैं। इतना कहकर वो लड़की

7:41

वहां से उठने लग जाती है। तभी युग उसका

7:44

हाथ पकड़ते हुए कहता है, अरे तुम तो नाराज

7:47

ही हो गई। मैं तो मजाक कर रहा था मेरी

7:49

जान। तुम जानना चाहती थी ना कि मेरी

7:52

जिंदगी में तुम्हारी क्या अहमियत है? तो

7:54

अब गौर से सुनो। इतना कहकर युग उस लड़की

7:57

को फिर से अपने पास बैठा लेता है और उसकी

7:59

आंखों में देखते हुए कहता है, तुम मेरी

8:02

जिंदगी की H2O हो। वो लड़की हैरानी के साथ

8:06

कहती है, H2O हूं मतलब? मतलब तुम मेरी

8:10

जिंदगी का पानी हो जिसे पीकर मैं अपनी

8:12

प्यास बुझाना चाहता हूं। तुम मेरी जिंदगी

8:15

की ऑक्सीजन हो जिसे मैं अपनी सांसों में

8:18

भर कर जीना चाहता हूं। इतना कहकर युग उस

8:20

लड़की के करीब चला जाता है। इतने करीब कि

8:24

अगर अब वो जरा सा भी आगे बढ़ता तो उसके

8:26

होंठ उस लड़की के होंठ से टकरा [संगीत]

8:28

जाते। वो लड़की एक लंबी आह भरते हुए कहती

8:31

है आप रुक क्यों गए? बोलते रहिए। तुम मेरी

8:35

जिंदगी का वह हसीन ख्वाब हो जिसे मैं रोज

8:38

देखता हूं। तुम मेरी जिंदगी का वो सुकून

8:40

हो जो मुझे तुम्हारी बाहों के सिवा कहीं

8:43

और नहीं मिलता। तुम मेरी जिंदगी का वो

8:45

हिस्सा हो जिसके बिना मैं कुछ नहीं। सच तो

8:49

यह है कि मेरा तुम्हारे बिना कोई वजूद

8:51

नहीं। युग को पता ही नहीं चल पाता कि कब

8:54

बातें करते-करते उसके होठ उस लड़की के

8:56

होठों से टकरा जाते हैं। दोनों के होंठ

8:59

चिपक गए थे। ठीक उसी तरह जिस तरह भंवरा

9:02

फूल से चिपकता है। जब युग और वह लड़की एक

9:06

दूसरे को स्पर्श करते हैं तो दोनों को

9:08

अपने-अपने बदन में एक कपकपी सी होती है और

9:11

दोनों एक दूसरे को अपनी बाहों में भर लेते

9:14

हैं। वो दोनों कब रेत पर लौट जाते हैं

9:16

उन्हें पता ही नहीं चलता। उस लड़की की

9:19

काली साड़ी में युग पूरी तरह गूंथ चुका

9:21

था। कोई इस बात का अंदाजा ही नहीं लगा

9:24

सकता था कि उस लड़की ने साड़ी भी पहनी हुई

9:26

थी। ऐसा लग रहा था जैसे वह साड़ी एक चादर

9:30

हो जिसमें वह दोनों समाए हुए थे। उस लड़की

9:33

के बदन का एक-एक अंग युग के अंग के साथ

9:36

स्पर्श हो रहा था। दोनों एक दूसरे में

9:38

समाहित हो गए थे। उन दोनों के रोम रोम में

9:41

आग लगने लग गई थी। युग उस लड़की के बहुत

9:44

करीब चला गया था। इतने करीब कि तेज-तेज़ चल

9:48

रही उस लड़की के दिल की धड़कनों को वो

9:50

साफ-साफ सुन पा रहा था। युग का मन ही नहीं

9:53

कर रहा था उस लड़की के बदन को छोड़ने का।

9:56

उसने अपने शरीर की पूरी ताकत लगाकर उसके

9:59

बदन को अपनी बाहों में जकड़ा हुआ था। वो

10:02

लड़की बड़ी हिम्मत से अपने हाथ छुड़ाते

10:04

हुए युग को रेत पर लेटाती है और एक-एक

10:07

करके उसके शर्ट के बटन खोलने लग जाती है।

10:10

युग अपने आप को उस लड़की को सौंप देता है

10:12

और रेत पर ही लेट कर आें भरने लग जाता है।

10:16

वो लड़की युग के शर्ट के बटन खोल देती है

10:19

और उसके माथे को चूमने लग जाती है। वो

10:22

लड़की युग के माथे को चूमते हुए कहती है,

10:24

आप मुझे भूलोगे तो नहीं ना? युग धीरे से

10:28

कहता है नहीं मैं तुम्हें नहीं भूलूंगा

10:31

कभी नहीं। वो लड़की बार-बार युग को चूमते

10:34

हुए बस यही बोले जा रही थी। आप मुझे

10:36

भूलोगे तो नहीं ना? और युग कहता नहीं कभी

10:40

नहीं। युग के अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही

10:43

थी। वो युग के माथे को चूमने के बाद नीचे

10:45

आने लग जाती [संगीत] है और उसके सीने को

10:48

चूमने लगती है। युग के अंदर की उत्तेजना

10:51

बढ़ते जा रही थी। उसका पूरा बदन पसीने से

10:54

भीग चुका था। उसके माथे और बदन पर पसीने

10:57

की बड़ी-बड़ी बूंदे थी। उसे अपने पूरे

11:00

शरीर में गर्मी का एहसास होने लग जाता है।

11:03

उसे ऐसा लग रहा था जैसे वह किसी आग में तप

11:06

रहा हो। देखते ही देखते गर्मी इतनी बढ़

11:09

जाती है कि उसकी नींद टूट जाती है और वो

11:12

अपने सपने में से बाहर आ जाता है। युग

11:15

झटके के साथ उठते हुए कहता है ओह माय गॉड

11:18

फिर वही सपना। इतना कहकर युग अपने माथे का

11:21

पसीना पोछने लग जाता है। उसका पूरा बदन

11:24

पसीने से लथपथ हो गया था। युग खुद से कहता

11:28

है, हे भगवान, यह क्या है? क्यों बार-बार

11:31

आप मुझे एक ही सपना दिखाते हो? और आखिर वो

11:34

लड़की कौन है जिसके साथ मैं यह सब करता

11:37

रहता हूं? [संगीत] इतने करीब तो मैं आज तक

11:39

अपनी जिंदगी में किसी लड़की के नहीं गया।

11:42

कौन है वो लड़की? क्या संबंध है मेरा उसके

11:44

साथ?

11:45

यही सब सोचते हुए युग अपनी जगह पर खड़ा

11:48

होता है। अपने बैग में से पानी की बोतल

11:50

निकालता है और पानी पीते हुए फिर सोचने लग

11:53

जाता है। यह सपना मेरा पीछा क्यों नहीं

11:56

छोड़ता? बेंगलुरु में भी यही सपना दिखता

11:58

था और यहां पर भी। सपने में जो नदी थी वह

12:01

तो किश्नोई नदी थी। पर वो लड़की कौन थी और

12:04

उसका चेहरा मुझे क्यों नहीं दिखता कभी?

12:07

युग वापस से लेट जाता है और कोठी की छत को

12:09

देखते हुए सोचने लगता है। नदी तो मिल गई।

12:13

हो सकता है वो लड़की भी मिल जाए। बस एक

12:15

बार वो लड़की मिल जाए फिर यह सारे सपनों

12:18

के राज खुल जाएंगे। कुछ ना कुछ कनेक्शन तो

12:21

जरूर है मेरा उस लड़की के साथ। [संगीत]

12:23

ऐसे ही सपने नहीं आते वो भी सेक्स वाले।

12:27

यही सोचते हुए युग की कब नींद लग जाती है

12:29

उसे पता ही नहीं चलता। सुबह हो गई थी और

12:33

सुबह के 7:00 बज रहे थे। अभिमन्यु अभी तक

12:35

गहरी नींद में सो रहा था। [संगीत]

12:42

तभी मुर्गे के बाग देने की आवाज सुनाई

12:44

देती है और अभिमन्यु की नींद खुल जाती है।

12:47

अभिमन्यु उबासी लेते हुए अपनी आंख खोलता

12:50

है और देखता है कि युग उससे पहले ही उठकर

12:53

बैठा हुआ था और कुछ सोच रहा था। अभिमन्यु

12:56

हैरानी के साथ कहता है, अरे युग तू कब उठ

12:59

गया? और सुबह-सुबह इतनी गहराई के साथ क्या

13:02

सोचने लग गया। पहले तो युग के मन में आया

13:05

कि वह उसे अपने सपने के बारे में बताया।

13:07

[संगीत] पर फिर अगले ही पल उसने सोचा कहीं

13:09

अभिमन्यु उसे पागल ना समझ ले। [संगीत]

13:11

इसलिए उसने कहा कुछ नहीं यार बस ऐसे ही

13:14

बैठा हुआ था। अभिमन्यु बात को बदलते हुए

13:18

कहता है वैसे तूने बताया नहीं। [संगीत]

13:20

युग हैरानी के साथ पूछता है क्या नहीं

13:23

बताया? यही कि तूने बोर क्यों छोड़ दिया?

13:26

तेरे यहां पर आने का मकसद [संगीत] क्या

13:27

है? यार मैंने बोर को नहीं छोड़ा बल्कि

13:30

बोर ने मुझे छोड़ दिया है। मतलब मैं कुछ

13:34

समझा नहीं। तू साफ-साफ बताएगा क्या कहना

13:36

चाहता है? मतलब यह कि मेरी बेंगलुरु में

13:38

जो जॉब थी वह चली गई। अभिमन्यु शॉक्ड होते

13:41

हुए कहता है, क्या कहा? जॉब चली गई पर

13:44

कैसे? युग चुप रहता है। कुछ जवाब नहीं

13:47

देता है। अभिमन्यु युग पर दबाव बनाते हुए

13:50

पूछता है, अरे तू चुप क्यों है? बता ना।

13:52

आखिर तेरी जॉब कैसे चली गई? युग लंबी सांस

13:56

लेते हुए कहता है, "मुझे कंपनी जॉइ किए

13:58

हुए एक साल ही हुआ था। सब कुछ ठीक चल रहा

14:01

था। ऐसा लग रहा था कि लाइफ सेट हो गई और

14:04

इसी कंपनी में फ्यूचर सेट हो जाएगा। पर

14:06

जैसा हम सोचते हैं वैसा होता कहां है?

14:09

होता भी कैसे अगर जिंदगी में सब चीजें

14:11

हमारे मुताबिक होने लगे तो उसे जिंदगी

14:13

नहीं कोई फिल्म की कहानी कहते हैं।

14:16

[संगीत] अभिमन्यु बीच में ही युग को टोकते

14:18

हुए कहता है यार तू बातें घुमा मत।

14:21

सीधे-सीधे बता हुआ क्या था? युग अपनी बात

14:23

को आगे जारी रखते हुए कहता है सब कुछ ठीक

14:26

ही चल रहा था कि तभी हम लोगों को बताया

14:28

गया कि कंपनी लॉस में चल रही है। जिस कारण

14:31

कंपनी की फाइनेंशियल कंडीशन खराब हो गई

14:33

थी। फाइनेंशियल कंडीशन से उभरने के लिए

14:35

कंपनी ने 50 एंप्लाइजस को निकालने का

14:37

फैसला किया था और जब लिस्ट आई तो उस लिस्ट

14:40

में मेरा भी नाम था। पर ऐसे कैसे? तुझे

14:42

कैसे निकाल दिया? तेरा तो कैंपस सिलेक्शन

14:45

हुआ था ना और पैकेज भी अच्छा था। हां, पर

14:48

तुझे पता है मेरी फील्ड इलेक्ट्रिकल और

14:50

इलेक्ट्रॉनिक्स की थी। पर साले काम कोडिंग

14:53

का कराते थे। पूरा घिस कर रख देते थे।

14:55

इतना परेशान करते थे कि आप खुद जॉब छोड़

14:58

दें या फिर खराब परफॉर्मेंस की वजह से

15:00

आपको वह खुद निकाल दें। तुझे पता है यह

15:02

कंपनी और कॉलेज वालों के बीच एक बहुत बड़ी

15:04

सेटिंग होती है। क्या कहा? सेटिंग होती

15:07

है। कैसी सेटिंग? देख मैं बताता हूं।

15:11

कंपनियां हर साल कॉलेज में आती हैं जिससे

15:13

कॉलेज का नाम होता है और हर साल नए एडमिशन

15:16

होते हैं। पर क्या कभी तूने यह सोचा है कि

15:19

जो कंपनियां आती हैं और हर साल कभी 100 तो

15:22

कभी 200 स्टूडेंट्स का सिलेक्शन करती हैं।

15:25

उनको किनकी जगह पर रखा जाता है? किनकी जगह

15:27

पर? उन एंप्लाइजस की जगह पर जिनको पिछले

15:30

साल कैंपस सिलेक्शन करके लाया गया था। यही

15:33

सिलसिला चलता जाता है और कॉलेज और

15:35

कंपनियों वालों का धंधा चलता रहता [संगीत]

15:37

है। पर साले यह नहीं सोचते कि जिनको

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उन्होंने जॉब से निकाल दिया उनका तो एक

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साल खराब हो गया ना। [संगीत] वो तो इसी

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उम्मीद से थे कि अब पूरी जिंदगी उन्हें

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कंपनी के साथ काम करना है। चल यह सब तो

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ठीक है। इसमें कॉलेज और कंपनी वालों का

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दोष था। तेरी बात समझ रहा हूं मैं। पर फिर

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तूने दूसरी कंपनी में कोई जॉब के लिए

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अप्लाई क्यों नहीं किया? ऐसा तो था नहीं

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कि दुनिया में बस एक ही कंपनी है और तू

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गवर्नमेंट जॉब के लिए भी तो ट्राई कर सकता

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था ना। तुझे क्या लगता है मैं बेवकूफ हूं?

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पिछले डेढ़ साल से दोनों जगह ट्राई ही तो

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कर रहा हूं पर कुछ हो ही नहीं रहा। जॉब

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हलवा थोड़ी है कि यूं मिल जाए। मिलती भी

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है तो काम की नहीं मिलती। ऊपर से पेमेंट

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कम। मतलब यह कि तुझे जॉब से डेढ़ साल पहले

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निकाल दिया गया है। हां, पिछले डेढ़ साल

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से जॉब ढूंढ रहा हूं और जॉब पाने के लिए

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कोचिंग भी जॉइ की पर कुछ काम नहीं आया।

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बल्कि उसी चक्कर में सारी सेविंग भी खत्म

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हो गई। हालत इतनी खराब हो गई कि बेंगलुरु

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छोड़कर गांव आना पड़ा। लोग जॉब करने के

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लिए गांव छोड़कर शहर जाते हैं। पर तू पहला

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ऐसा शख्स है जो शहर छोड़कर गांव आया है।

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बता फिर क्या सोचा है यहां गांव में आकर

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क्या करने वाला है तू? युग कुछ जवाब नहीं

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देता। अभिमन्यु युग पर दबाव बनाते हुए

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पूछता है। [संगीत] बता यार यहां गांव में

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क्या करने वाला है? मैंने गांव में एक

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स्टार्टअप खोलने का फैसला किया है। कैसा

16:51

स्टार्टअप?

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[संगीत]

16:53

सदियों से है पुरानी।

16:56

यह है यक्षिणी की कहानी

17:01

यक्षिणी एक आग है यक्षिणी तेरा ख्वाब है

17:09

[संगीत]

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