The Middle Class TRAP | Why You'll Work Till You Die | Dhruv Rathee
आज का यह वीडियो दोस्तों, आपकी जिंदगी का
सबसे इंपॉर्टेंट वीडियो हो सकता है।
लिटरली लाइफ चेंजिंग, इसलिए ध्यान से
देखना। रात के 9:00 बज रहे हैं। गुड़गांव
का एक आईटी ऑफिस 26 साल का अमित सुबह 9:00
बजे से काम पर आया हुआ है। अभी तक वापस
नहीं गया। मैनेजर ने 6:00 बजे एक और
अर्जेंट टास्क दे दिया था। [संगीत] लैपटॉप
की स्क्रीन पर एक्सेल शीट खुली है लेकिन
अमित की आंखें वहां नहीं है। वो तो साइड
में अपने फोन पर एक ट्रैवल ब्लॉगर को देख
रहा है। सुंदर सी पहाड़ियां, खुला नेचर,
आजादी। उसके दिमाग में बस एक ही सवाल घूम
रहा है। क्या बाकी की जिंदगी भी ऐसे ही
कटेगी?
वैसे तो बाहर से सब सेट है। Lindin पर कुछ
ही टाइम पहले प्राउड टू अनाउंस वाली पोस्ट
डाली थी। पेरेंट्स कहते हैं बेटा सेट हो
गया। दोस्त ने कहा अब तो मजे ही मजे हैं।
सैलरी 12 लाख की थी। कुछ ही दिनों में
लड़की वाले देखने आ रहे हैं। लेकिन अंदर
से कुछ टूटा हुआ सा फील [संगीत] हो रहा
था। एक तरह का खालीपन, एक तरह की नमनेस और
यह फीलिंग सिर्फ अमित की नहीं है। यह
लाखों करोड़ों लोगों की है। वो बंदा जो
25,000 की सैलरी में हर सुबह मेट्रो में
कैंडी क्रश खेल रहा होता है। वो जो ऑफिस
जाता है, ट्रैफिक जैम में एफएम सुनता है।
शाम को घर आता है। वीकेंड पर दोस्तों के
साथ बाहर घूमने निकलता है। आईपीएल देखता
है और मंडे सुबह फिर से वही अलार्म। वही
रूटीन, वही नमनेस। इन्हीं लोगों के बारे
में पाश ने लिखा था सबसे खतरनाक होता है
मुर्दा शांति से भर जाना ना होना तड़प का
सब सहन कर जाना [संगीत] घर से निकलना काम
पर और काम से लौट कर घर आना सबसे खतरनाक
होता है हमारे सपनों का मर जाना
नमस्कार दोस्तों 2024 में गैलप ने दुनिया
का सबसे बड़ा वर्क प्लेस सर्वे किया था
1400 लोग 160 से ज्यादा देशों में और
इसमें पाया गया कि दुनिया भर के वर्कर्स
में से सिर्फ 23% लोग अपने काम में ट्रूली
एंगेज्ड हैं। बाकी 77% या तो क्वाइट
क्विटिंग कर रहे हैं या एक्टिवली
डिसएंगेज्ड है अपनी जॉब में। साउथ एशिया
और इंडिया में तो और भी बुरा हाल है।
सिर्फ 21% लोग ही एंगेज्ड हैं। यानी 10
में से 8 से नौ लोग हर सुबह एक ऐसी जगह पर
काम करने जाते हैं जहां उनका दिल नहीं
लगता। यह लोग शाम को थके हारे घर पर आते
हैं। वीकेंड का इंतजार करते हैं और फिर
मंडे आ जाता है। यह साइकिल साल भर साल
चलती रहती है। कभी-कभी तो पूरी की पूरी
जिंदगी। लेकिन जानते हो यही सर्वे एक और
चीज भी बताता है। वो 23% लोग जो एंगेज्ड
हैं वो ना सिर्फ ज्यादा खुश हैं अपनी
जिंदगी में बल्कि वो 18% ज्यादा
प्रोडक्टिव भी हैं और उनकी कंपनीज 23%
ज्यादा प्रॉफिटेबल भी हैं। तो सवाल यह
नहीं है कि पैशन फॉलो करना लग्जरी है या
नहीं? सवाल यह है कि पैशन ना फॉलो करना
कितना महंगा पड़ रहा है आपको, [संगीत]
आपके आसपास वालों को और देश की इकॉनमी को।
आज के वीडियो में दोस्तों मैं आपके करियर,
आपके पैशन और आपके सपनों के बारे में कुछ
ऐसा एडवाइस देना चाहूंगा जो शायद आपने
पहले कभी नहीं सुना होगा। लेकिन अगर आप
ध्यान से सुनोगे तो शायद यह आपके पूरे
जीने का [संगीत] नजरिया बदल देगा। आपकी
जिंदगी का यह सबसे जरूरी वीडियो बन जाएगा।
फॉलो योर पैशन। दिल की सुनो। अंदर झांको।
एक दिन सब क्लियर हो जाएगा। अमित ने भी
ऐसी मोटिवेशनल रील्स बहुत देखी। कोई कहता
क्विट योर 9 टू5 तो कोई कहता फॉलो योर
हार्ट। लेकिन हर वीडियो को देखने के बाद
वो और ज्यादा कंफ्यूज्ड हो जाता। क्योंकि
दिक्कत यह थी कि जितनी बार उसने अपने अंदर
झांकने की कोशिश की उतनी ही बार उसे कुछ
नहीं मिला। फिर उसने सोचा शायद मैं ही
प्रॉब्लम हूं। शायद मेरे अंदर कोई पैशन है
ही नहीं। यहां पर दो तरीके के लोग देखने
को मिलते हैं। पहले वो जो कहते हैं अरे
भाई यह पैशन वैशन कुछ नहीं होता। यह सब
बकवास है। बस पैसे कमाने पर ध्यान दो। और
दूसरे जो अमित की तरह कहते हैं कि मैं
चाहता तो हूं लेकिन मुझे पता ही नहीं कि
मेरा पैशन क्या है। असल में दोनों ही
सोचने के नजरिए गलत हैं। 2018 में
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्च ने एक
ये बड़ी लैंडमार्क स्टडी पब्लिश करी थी।
इन्होंने पाया कि अमित जैसे लोग फिक्स्ड
माइंडसेट में फंसे हुए होते हैं। यह वो
लोग हैं जो मानते हैं कि पैशन जन्मजात है।
कि अंदर कहीं पैशन छुपा हुआ है। बस ढूंढने
की देर है। एक बार मिल जाए तो मैं भागकर
उसे फॉलो करने लग जाऊंगा। यह सोच गलत है।
स्टडी के अनुसार पैशन कोई छुपा हुआ खजाना
नहीं है बल्कि एक पौधा है जिसे उगाना
पड़ता है। प्रोफेसर कैल न्यूपोर्ट अपनी इस
वाली किताब में लिखते हैं कि फॉलो योर
पैशन इसलिए बुरा एडवाइस है क्योंकि यह
आपको पैसिव बना देता है। आप हाथ धरे बैठे
रहते हो कि कब पैशन मिलेगा? कब आसमान से
पैशन टपकेगा। न्यू पोर्ट कहते हैं कि पहले
किसी चीज में जेन्युइनली अच्छे बनो। स्किल
डेवलप करो।स्ट्री से ऑटोनोमी आएगी और पैशन
वहीं से डेवलप होगा। तो फार्मूला यह नहीं
है कि पैशन ढूंढो और फिर काम करो।
फार्मूला यह है एक्सप्लोर करो, ट्राई करो,
डीप में जाओ, स्किल बनाओ और पैशन खुद ब
खुद आपको दिखाई देने लगेगा। लेकिन अब सवाल
यह उठता है कि अगर फार्मूला इतना ही आसान
है तो देश में 80% से ज्यादा लोग यह क्यों
नहीं कर पाते? नेहा की कहानी से समझते
हैं। 34 साल की नेहा एक मैरिड वूमेन है।
इनके दो बच्चे हैं। 12वीं के बाद ही शादी
हो गई थी। सपना था शेफ बनने का लेकिन 10
साल तक खुद से कहती रही मेरा वक्त निकल
गया है। एक दिन इसने अपने बड़े बेटे के
बर्थडे पर केक बनाया बेहद सुंदर। एक
पड़ोसन ने देखा और कहा अरे यह बेच क्यों
नहीं देती? इतने सुंदर केक की तो तुम्हें
दुकान खोल लेनी चाहिए। नेहा ने हंसकर टाल
दिया। लेकिन पड़ोसन ने फोटो WhatsApp
ग्रुप में डाल दी। और तीन ऑर्डर्स आ गए।
अब आगे की कहानी वो है जो मोटिवेशनल
वीडियोस आपको नहीं बताते। पहले तीन
ऑर्डर्स में से एक केक खराब हो गया।
कस्टमर ने ऐसी कंप्लेन करी कि नेहा ने
अगले 2 दिन तक घर पर कुछ भी खाना नहीं
बनाया। वो सोचने लगी कि कितनी बड़ी गलती
कर दी मैंने। अब यह सब बंद करना होगा। असल
में मेरी औकात ही नहीं है ये करने की। पति
ने उधर से और दो बातें सुना दी।
अरे मैंने तो कहा था ना यह सब टाइम पास
बकवास है। बंद करो ये सब करना।
और यही वो मोमेंट था दोस्तों जहां पर 80%
से ज्यादा लोगों के लिए दरवाजे बंद हो
जाते हैं। नेहा के सामने भी दो ऑप्शंस थे।
कंफर्टेबल चॉइस थी बंद कर देना।
अनकंफर्टेबल चॉइस थी दोबारा से ट्राई
करना। कंफर्ट भरी हुई गुलामी या डिसकंफर्ट
भरी हुई आजादी। कुछ दिन बाद एक और आर्डर
आता है किसी और पड़ोसी से। नेहा फिर से
ट्राई करती है और इस बार केक अच्छा बन
जाता है। अगले कुछ महीनों में यह चीज फिर
से होती है। धीरे-धीरे नेहा अपने काम में
इतनी मगन होने लगी कि उन्हें समय का
अंदाजा ही नहीं रहा। नेहा जो यहां पर
महसूस कर रही थी उसे साइंस में फ्लो स्टेट
कहा जाता है। साइकोलॉजिस्ट सिस्क सेंट
मिहाली ने साल 1990 में एक कांसेप्ट
इंट्रोड्यूस किया था। जब आप किसी काम में
इतना डूब जाते हो कि आपको समय का पता ही
नहीं चलता। ना भूख लगती है ना फोन देखने
का मन करता है। जब आपका माइंड और आपकी
बॉडी पूरी तरीके से 100% एक ही चीज पर
फोकस्ड होती है। लेकिन आयरोनिकली इतना
फोकस्ड होने के बावजूद आपको रिलैक्स
[संगीत] सा महसूस होता है। इसे फ्लो स्टेट
कहा जाता है। फ्लो में लोग 500% तक ज्यादा
प्रोडक्टिव हो सकते हैं। यह तब होता है जब
आप किसी काम के बारे में पैशनेट हो और काम
का डिफिकल्टी लेवल ऐसा हो कि ना बहुत आसान
ना ही बहुत मुश्किल। आपकी काबिलियत के
अनुसार परफेक्टली चैलेंजिंग। नेहा को यह
शब्द नहीं पता था। बस एक्सपीरियंस पता था।
14 महीने बाद नेहा जयपुर में आज क्लाउड
किचन चलाती हैं। घर के अवन से शुरू किया
था जीरो इन्वेस्टमेंट। आज Zomato और Sविg
पर रजिस्टर्ड है। लेकिन यह रातोंरात नहीं
हो गया। बीच में 3 महीने ऐसे भी आए जब कोई
आर्डर नहीं आया। पति और सास ने प्रेशर
किया कि बंद कर दो। लेकिन नेहा ने बंद
नहीं किया। तो आपको वो काम ढूंढना है
जिसमें आप फ्लो स्टेट महसूस करते हो।
लेकिन यह सिर्फ सोच कर नहीं पता लगेगा।
आपको करके देखना पड़ेगा। अब नेहा को तो
पता था कि उन्हें कुकिंग पसंद है, शेफ
बनना है। लेकिन बहुत से लोगों को तो यही
नहीं पता होता कि उन्हें क्या पसंद है।
अगर आप भी इन्हीं लोगों में से हो तो गलती
आपकी नहीं है। जब आपकी स्कूल ट्रिप कभी
किसी आर्कियोलॉजी साइट पर गई ही नहीं तो
आर्कियोलॉजिस्ट होना एक्साइटिंग कैसे
लगेगा? जब आपके फैमिली सर्कल में कोई
ऑर्ननेथोलॉजिस्ट है ही नहीं तो आपके मन
में ऑर्ननेथोलॉजिस्ट बनने का ख्याल कहां
से आएगा? स्कूल में कभी स्कल्प्चर ट्राई
आउट नहीं करवाया गया तो स्कल्प्चर होना
आपका ख्वाब कैसे होगा?
फेमस साइंटिस्ट के ऊपर हमने कोई बॉलीवुड
फिल्म देखी ही नहीं तो साइंटिस्ट बनने का
ख्याल कहां से आएगा? स्कूल में हमें साइंस
रट्टा मारकर पढ़ाई जाती है। क्लासिकल
म्यूजिक का कोई एक्सपोज़र नहीं दिया जाता।
हमें प्रकृति तो पसंद है लेकिन हम नहीं
जानते कि एनवायरमेंटलिस्ट बनने का क्या
स्कोप है। असल में दोस्तों दुनिया में
12,000 से ज्यादा रिकग्नाइज्ड करियर
कैटेगरीज हैं। लेकिन इंडिया में एक एवरेज
स्टूडेंट को सिर्फ 10 से 15 करियर ऑप्शंस
के बारे में ही पता होता है। इंजीनियर,
डॉक्टर, लॉयर, टीचर, सीए, एमबीए, सरकारी
नौकरी, क्रिकेटर, एक्टर और यूबर। बस खत्म
कहानी। इसीलिए अगर आपको अपना पैशन नहीं
पता तो इसमें गलती आपकी नहीं है। सिस्टम
ने आपको एक्सप्लोर करने का मौका ही नहीं
दिया। प्रॉब्लम इंटरेस्ट की नहीं है,
एक्सपोज़र की है। डेविड एपस्टीन ने अपनी
किताब रेंज में एग्जैक्टली यही पैटर्न
डॉक्यूमेंट किया है। वैसे इस वाले एपस्टीन
का उस वाले एपस्टीन से कुछ लेना देना नहीं
है। इन्होंने पाया कि वर्ल्ड क्लास
परफॉर्मर्स ने शुरुआत में बहुत सी चीजें
ट्राई की थी। जैसे कि रजर फेडरर इन्होंने
बचपन में फुटबॉल, बास्केटबॉल, हैंडबॉल,
क्रिकेट सब कुछ खेला था। यह सिर्फ बाद में
ही था कि इन्होंने टेनिस में स्पेशलाइज
[संगीत] किया। ऐसी ही कुछ कहानी है
महेंद्र सिंह धोनी की भी। उन्होंने बचपन
में फुटबॉल, क्रिकेट, बैडमिंटन सब ट्राई
किया था। [संगीत] स्कूल में तो वह अपनी
फुटबॉल टीम के गोलकीपर थे लेकिन बाद में
जाकर वो क्रिकेट में सबसे महान प्लेयर
बने। डेविड एपस्टीन लिखते हैं कि जो लोग
जल्दी स्पेशलाइज करते हैं वो शॉर्ट टर्म
में आगे निकलते हैं। लेकिन लॉन्ग टर्म में
सैंपलर्स जीतते [संगीत] हैं। एसेंशली
बिकॉज़ दे वर मेड टू चूज़ सो अर्ली दैट दे
मोर ऑफन मेड पुअर चॉइसेस। सो द लेट
स्पेशलाइज़र्स लूज इन द शॉर्ट टर्म एंड विन
इन द लॉन्ग रन। 100्स ऑफ वर्ल्ड क्लास
परफॉर्मेंस पर स्टडी करने के बाद इन्होंने
पाया कि जो लोग सबसे ज्यादा सक्सेसफुल
[संगीत] हुए वो वो थे जिन्होंने अपने
करियर की शुरुआत में एक सैंपलिंग पीरियड
रखा। एक ऐसा समय जहां पर उन्होंने बहुत
सारी अलग-अलग चीजें ट्राई आउट करी।
दे गेट जनरल स्किल्स दे लर्न अबाउट देर
इंटरेस्ट एंड एबिलिटीज एंड डिले
स्पेशलाइजिंग
लेटर देन लेवल्स।
तो असल में दोस्तों पहला स्टेप [संगीत]
पैशन ढूंढने का यह नहीं है कि अंदर झांको।
पहला स्टेप है बाहर देखो। दुनिया बड़ी
करो। 30 दिन के लिए हर दिन 30 मिनट तक एक
नया करियर एक्सप्लोर करो। और इसी चीज में
आपकी मदद करने के लिए मैंने आपके लिए यह
फ्री पीडीएफ गाइड बनाई है 100 करियर्स।
इसमें 100 से ज्यादा करियर्स के बारे में
एक्जेक्टली लिखा है कि उन्हें कैसे
एक्सप्लोर करना है। कंप्लीटली फ्री टू
डाउनलोड है। लिंक इसका नीचे आपको
डिस्क्रिप्शन और पिंट कमेंट में मिल
जाएगा। आगे वीडियो में मैं आपको एक थ्री ई
फार्मूला भी दूंगा जो आपको स्टेप बाय
स्टेप बताएगा कि एक्सैक्टली क्या करना है।
अभी के लिए अमित की कहानी पर वापस आए तो
उसके साथ कुछ ऐसा हुआ जो उसे किसी ने नहीं
बताया था। एक मंडे रात को वह 14 घंटे काम
करके घर वापस लौटा था। रात के करीब 1:30
बजे सोया और 3:00 बजे उसकी नींद खुलती है।
सीने में दर्द, सांस नहीं आ रही। हाथ
कांपने लगे। कुछ देर बाद वो हॉस्पिटल
पहुंचता है। ईसीजी कराया जाता है। रिपोर्ट
आती है और डॉक्टर कहते हैं हार्ट अटैक
नहीं था लेकिन [संगीत] पैनिकिक अटैक था।
डॉक्टर ने कहा स्ट्रेस कम करना होगा। अमित
ने अंदर ही अंदर सोचा। लेकिन कैसे? अगर
मैंने जॉब छोड़ दी तो ईएमआई कौन भरेगा?
असल में अमित जब 16 साल का था तभी से उसके
पेरेंट्स ने एक कोचिंग सेंटर का पोस्टर
देखकर डिसाइड कर लिया था कि उनका बेटा
क्या बनेगा।
मेरा बेटा इंजीनियर बनेगा।
ज्यादा नहीं बस दो ही ऑप्शंस थे। आईआईटी
या नीट। उसके पेरेंट्स ने उसे आईआईटी की
कोचिंग करवाई। 3 से ₹ लाख की कोचिंग फीस।
बाद में कोटा भेजा। प्रेशर तभी से बन गया
था। हॉस्टल में अकेले रहना। हफ्ते में
70-70 घंटे पढ़ाई और अगर रैंक नहीं आई तो
पेरेंट्स कहेंगे कि तूने तो पैसों पर आग
लगा दी। जब तक वह 22 साल का हुआ और उसने
किसी प्राइवेट कॉलेज से अपनी इंजीनियरिंग
खत्म करी है। एजुकेशन लोन बढ़कर 10 लाख तक
पहुंच चुका था। पहली नौकरी मिली 25,000 की
सैलरी पर। तो पहले दो-चार साल तो एजुकेशन
लोन खत्म करने में ही लग गए। फिर एक नई
बाइक खरीदी ईएमआई। सैलरी जरूर बढ़ी लेकिन
गाड़ी खरीदने का मन किया और ईएमआई। घर का
सपना, होम लोन, 20 साल की ईएमआई।
यह कहानी सिर्फ अमित की ही नहीं बल्कि देश
में करोड़ों लोगों की है। सरकारी स्कूल
अच्छे नहीं है तो प्राइवेट स्कूल जाना
पड़ता है। सरकारी हॉस्पिटल अच्छे नहीं है
तो प्राइवेट हॉस्पिटल। पब्लिक ट्रांसपोर्ट
अच्छा नहीं है तो गाड़ी खरीदनी पड़ती है।
सड़कों में गड्ढे हैं तो महंगी गाड़ी
खरीदो। वाटर पोल्यूशन है तो प्यूरीिफायर
खरीदो और एयर पोल्यूशन है तो एयर
प्यूरीिफायर लगाओ। हर प्रॉब्लम का सशन एक
और खर्चा। और हर खर्चे का सॉल्यूशन एक और
ईएमआई। जब आपकी आधी सैलरी ही ईएमआई में जा
रही है तो टॉक्सिक जॉब भी छोड़ना इंपॉसिबल
हो जाता है। यही है सोने का पिंजरा और इस
पिंजरे का सबसे बड़ा कारण एक्चुअली में
फोमो है। कहीं बाकी लोग बड़ी-बड़ी फॉरेन
ट्रिप्स ना कराएं। कहीं मुझसे बड़ी
गाड़ियां ना खरीद लें। कहीं मुझसे महंगे
कपड़े ना पहन लें। इसलिए मुझे अच्छे खासे
पैसे कमाने पड़ेंगे। कहीं मैं पीछे ना रह
जाऊं। और इसी पिंजरे को मजबूत बनाया है
हसल कल्चर ने। टॉक्सिक काम को रिब्रांड कर
दिया। रात के 11:00 बजे तक ऑफिस में बैठो।
देखो ये डेडिकेशन है और वीकेंड पे काम
ग्रोथ माइंडसेट है।
आवर यंगस्टर्स मस्ट से आई वांट टू वर्क 70
आवर्स [संगीत] एपी।
आई डोंट थिंक वर्क लाइफ बैलेंस इज द राइट
कॉनंस्ट्रक्ट। सैटरडे संडे का इज नॉट अ
इंडियन थिंग। दिस इज अ वेस्टर्न थिंग।
यह पिंजरा सिर्फ आपकी खुशी नहीं लिटरली
आपकी जिंदगी आपसे छीन रहा है। और इस
सिस्टम को तोड़ना आसान नहीं है। शुरुआत से
ही गलत माइंडसेट आपको सिखाया गया। करियर
एक्सपोज़र नहीं दिया गया। कोचिंग इंडस्ट्री
ने इस वैक्यूम को एक्सप्लइट किया। ईएमआई
साइकिल ने नौकरी छोड़ना इंपॉसिबल बना
दिया। सरकार ने जीना मुश्किल बना दिया और
स्कूल से लेकर कॉलेज तक सिर्फ ओबिडियंस
सिखाया गया। यही कारण है दोस्तों कि 85%
लोग इसी सिस्टम में फंसे हुए हैं और यह
लोगों की गलती नहीं है। लेकिन अगर आप इस
पिंजरे से बाहर निकलना चाहते हो, इस
सिस्टम को तोड़ना चाहते हो तो आपके लिए एक
प्रैक्टिकल प्लान भी है। अमित जिस रात उस
हॉस्पिटल के बिस्तर पर बैठा था, उसे एक
ऐसी चीज याद आई जो उसने 14 सालों से नहीं
करी थी। एक ऐसी चीज जो वो बचपन में अपने
नाना जी के साथ किया [संगीत] करता था। वुड
कार्बिंग। एक दिन उसने वीकेंड पर यूं ही
सोचा चलो ट्राई करते हैं। 45 मिनट तक
ट्राई किया। हाथ कांपे और रिजल्ट बड़ा
बेकार था। उसे अपने नाना जी की याद आई और
आंखें आंसुओं से भर उठी। लेकिन उस दिन एक
और चीज हुई। उस 45 मिनट में उसने एक बार
भी अपना फोन नहीं उठाया। अगले सैटरडे उसने
फिर से कोशिश करी। एक घंटा इस बार।
धीरे-धीरे मजा आने लगा था। तीसरे दिन 2
घंटे। एक हफ्ते बाद तो वह वीक डे पर भी
मंडे को रात के 9:00 बजे से लेकर 11:00
बजे तक कार्विंग कर रहा था। दूसरे हफ्ते
उसकी वाइफ ने उससे पूछा अरे तुम रात को यह
क्या करते रहते हो? लकड़ी का बुरादा साफ
कौन करेगा? तीसरे हफ्ते कोलीग ने उससे
कहा। अबे साइड बिज़नेस शुरू करने की
प्लानिंग है क्या? हां सोच तो रहा हूं।
[हंसी]
यार 2026 में कौन वुड कार्विंग करता है?
इससे अच्छा कोडिंग करना सीख ले।
लेकिन उसने बंद नहीं किया। 1 महीने तक
कार्विंग ट्राई करते रहने के बाद वह
एक्चुअली में काफी अच्छा हो गया था अपने
काम में। ऑथर जॉर्ज कॉफमैन अपनी किताब में
भी यही कहते हैं कि किसी भी नई स्किल को
रीज़नेबली गुड लेवल तक पहुंचने में सिर्फ
20 घंटे लगते हैं। सिर्फ 20 घंटे। मतलब हर
दिन 45 मिनट लगाओ तो एक महीने में पता चल
जाएगा कि यह आपकी चीज है या नहीं। और
एंजला डकवर्थ का यह वाला रिसर्च पेपर
देखो। इसमें बताया गया है कि सक्सेस का
सबसे बड़ा प्रेडिक्टर ना आईक्यू है और ना
टैलेंट है। यह है ग्रिट जीआरआईटी जो होता
है पैशन प्लस परवेयरेंस। और यहां पैशन का
मतलब लॉन्ग टर्म कंसिस्टेंसी ऑफ इंटरेस्ट
है। मतलब एक ही डायरेक्शन में सालों तक
लगे रहना उस काम में। डकवर्थ कहती है कि
जिन लोगों में ग्रिट होता है, वह लोग
डेलीबेट प्रैक्टिस करते हैं। यानी
टारगेटेड इंप्रूवमेंट पर फोकस करते हैं।
हर दिन थोड़ा बेहतर कैसे बना जाए इस चीज
में लगे रहते हैं।
[संगीत]
[संगीत]
वेस्ट पॉइंट मिलिट्री एकेडमी के कैडिट्स
में भी यही देखा गया। जिनका ग्रिड स्कोर
ज्यादा था वो सर्वाइव करते थे। चाहे उनका
एपटीट्यूड स्कोर कम भी क्यों ना हो।
स्पेलिंग भी कंपटीशंस में भी यही देखा
गया। ग्रिटी बच्चे ज्यादा प्रैक्टिस करते
थे और आगे जाते थे। और ग्रिट कोई ऐसी चीज
नहीं थी जो पैदाइशी हो। एक बार फिर से
पैशन की तरह यह एक पौधा था जिसे उगाना
पड़ता है। डेवलप होता है टाइम के साथ-साथ।
यह तब आता है जब आपको किसी काम में सच्ची
दिलचस्पी हो और दिलचस्पी तब आती है जब आप
वो काम करते हो। एक्चुअली में ट्राई करते
हो। अमित ने जब 20 घंटे वुड कार्विंग में
लगाए, तब उसे पता चला कि यह वो चीज है
जिसमें मुझे फ्लो स्टेट महसूस होता है। और
उसके बाद की जर्नी 2 साल की थी। पहले उसने
Instagram पेज बनाया। पहले 4 महीने में
सिर्फ 200 फॉलोवर्स आए। कोई सेल नहीं हुई।
6 महीने तक जीरो इनकम थी। वाइफ का पेशेंस
खत्म हो रहा था। उसने ऑलमोस्ट बंद कर दिया
था। लेकिन फिर एक दिन एक एनआरआई ने उसके
पीस को देखा Instagram पर और ऑर्डर कर
दिया $7।
पहली सेल $47 की। आज 2 साल बाद उसकी साइड
इनकम 25 से ₹00 महीने की है। नौकरी अभी भी
करता है लेकिन अब उसके पास एक एग्जिट
प्लान है। और सबसे बड़ी चीज पैनिकिक
अटैक्स। वो पूरी तरीके से बंद नहीं हुए
अभी भी। कभी कबभार अभी भी उसे पैनिकिक
अटैक्स आते हैं। लेकिन अब जब उसे पैनिकिक
अटैक आता है तो वह वर्क बेंच पर जाता है
और लकड़ी में छेनी लगाता है। 45 मिनट बाद
अपने आप ठीक हो जाता है। डॉक्टर ने पूछा
कि क्या फर्क है? पहले और अब में क्या
बदला? उसने जवाब दिया पहले मेरी जिंदगी
में कुछ नहीं था जो सिर्फ मेरा हो। अब है।
अब आप शायद मुझसे पूछोगे कि यार अमित को
तो फिर भी वुड कार्विंग की याद आ गई लेकिन
मुझे तो अभी भी नहीं पता कि मेरा पैशन
क्या है? तो यहां पर दोस्तों मैं आपको एक
सिंपल सा थ्री ई फार्मूला देना चाहूंगा जो
लेटेस्ट साइंटिफिक रिसर्च पर आधारित है।
थ्री ईस एक्सप्लोर [संगीत]
एंगेज एंड एक्सेल। पहले 30 दिन के लिए
आपके लिए पहली स्टेप है [संगीत] एक्सप्लोर
यानी अपनी दुनिया को बड़ी करो। नए-नए
करियर्स को एक्सप्लोर करो। शू पेंटर से
लेकर ट्रैकिंग [संगीत] गाइड तक क्लाउड
किचन से लेकर मरीन बायोलॉजिस्ट तक 12,000
से ज्यादा करियर कैटेगरीज हैं और आप अभी
भी 1015 को ही जानते हो। आपकी मदद करने के
लिए मैंने एक फ्री पीडीएफ गाइड बनाई है
जिसमें 100 अलग-अलग करियर ऑप्शंस लिस्टेड
[संगीत] हैं। 100 डिफरेंट करियर ऑप्शंस।
अलग-अलग कैटेगरीज में इन्हें अरेंज किया
है और इसमें डिटेल में लिखा है मैंने
[संगीत] कि एग्जैक्टली इन करियर ऑप्शंस को
एक्सप्लोर कैसे करना है? क्या स्किल्स
आपको चाहिए और शुरुआत आप कैसे कर सकते हो।
इवन यह तक लिखा है कि इन करियर्स को
एक्सप्लोर करने का खर्चा कितना आएगा। यह
कंप्लीटली फ्री टू डाउनलोड है आपके लिए।
इसका लिंक नीचे [संगीत] डिस्क्रिप्शन और
पिंड कमेंट में मिल जाएगा। आप जाकर इस
पीडीएफ को डाउनलोड कर सकते हैं और प्रिंट
आउट ले [संगीत] सकते हैं। तो इन 100
अलग-अलग करियर्स पर नजर डालिए और पहली नजर
में इनमें से जो 30 आपको बेस्ट लग रहे हैं
उन्हें चुन लीजिए। अगले 30 दिन तक आपको
30-30 मिनट लगाने हैं हर एक करियर को
एक्सप्लोर करने [संगीत] में और यह जानने
की कोशिश करनी है कि आपको इस काम में मजा
आएगा कि नहीं आएगा और यह भी याद रखिए कि
100 करियर ऑप्शंस 12,000 पॉसिबल करियर्स
का सिर्फ एक सबसेट है। स्टेप [संगीत] टू
एंगेज यानी अपने हाथ गंदे करो। इन 30
करियर्स को जब आपने एक्सप्लोर किया होगा
तो उसके बाद कुछ ऐसी चीजें आपको लगी होंगी
जो आपको एक्साइट करती हैं। और कुछ ऐसी
चीजें होंगी जो आपको इतनी पसंद नहीं आई।
अब जिन चीजों को लेकर आपको अंदर से
एक्साइटमेंट फील होती है, उनकी लिस्ट
बनाना चालू करो। इस लिस्ट में पांच से सात
ऐसे करियर्स लिखो [संगीत] ज्यादा नहीं। इन
लिस्ट में मौजूद चीजों को अब आपको
एक्चुअली में ट्राई करना होगा। रियल लाइफ
प्रोजेक्ट्स करने होंगे 20- 20 घंटे के
लिए। ये 20 घंटे की लिमिट जोश कॉफमैन का
थ्रेशहोल्ड है। आपने पांच चीजें चुनी है
तो हर एक पर एक महीना लगाइए। 20 घंटा एक
महीने में होता है रोज के 45 मिनट। ये
रियल वर्ल्ड प्रोजेक्ट्स एक्जेक्टली कैसे
किए जाएंगे? उदाहरण से समझाता हूं। मान लो
आपने फोटोग्राफी एस अ करियर चुना। इसमें
एंगेज करने के लिए आपको कम से कम 100
फोटोस लेनी होंगी। अगर आप वेडिंग
फोटोग्राफी में जाना चाहते हो तो किसी
शादी को अटेंड करो। वहां पर बात करो और
उन्हें बोलो कि मैं फ्री में वेडिंग
फोटोग्राफी करना चाहता हूं। 20 घंटे तक
एंगेज करो अपने आपको इस काम में। ऐसे ही
अगर केक बनाना आपको एक्साइट कर रहा है तो
इसमें रियल वर्ल्ड प्रोजेक्ट होगा कि आप
अपने पड़ोस में लोगों को कहो कि मैं आपके
लिए केक बनाऊंगा। अपने नेबरहुड में एक
फ्री पार्टी रखो। सबको इनवाइट करो अपना
केक खिलाने के लिए। अगर आपने राइटिंग एज अ
करियर चुना तो कम से कम 10 ब्लॉग पोस्ट
लिखो। अगर आपने कंटेंट क्रिएशन अपना करियर
चुना तो कम से कम 20 घंटे लगाओ अलग-अलग
वीडियोस को बनाने में। कुछ चीजों में
थोड़ा क्रिएटिव होना पड़ेगा। जैसे शू
पेंटिंग जैसी चीज सुनने में बड़ी अजीब सी
लगती है। लेकिन शू पेंटिंग का मतलब है आप
जूतों पर एक्रेलिक से पेंट करो और ये बड़े
सुंदर-सुंदर दिख सकते हैं। ऐसे जूतों का
मार्केट होता है। कई सारे छोटे-छोटे
बिजनेसेस Instagram पर इन्हें बेचते हैं।
तो अगर यह करना है तो 20 घंटे के लिए आप
शू पेंटिंग करो। देखो आपको कितना मजा आ
रहा है करते हुए और कितना अच्छा आप कर पा
रहे हो। ऐसे ही कस्टमाइज टीशर्ट्स की भी
मार्केट है। अगर आपको ट्रैकिंग पसंद है तो
फ्री में ट्रैक गाइड बनो किसी के लिए। अगर
आप वीक डेज में अपनी 9 टू फाइव जॉब में
बिजी हो या स्कूल में बिजी हो तो वीकेंड
पे अपना पैशन प्रोजेक्ट बनाओ। ठीक वैसे ही
जैसे नेहा ने अपने घर पर केक बनाना शुरू
किया था। वीकेंड पर शुरू किया। बच्चों के
सोने के बाद अमित ने ऑफिस के बाद रात के
9:00 से 11:00 बजे अपनी वुड कार्विंग करी
और एंगेज करते वक्त इस चीज का ध्यान रखो
कि आपको यह फ्लो स्टेट किस चीज में महसूस
हो [संगीत] रहा है। क्योंकि फिर आती है
स्टेप थ्री एक्सेल। अपने काम में इतने
अच्छे बनो कि इग्नोर करना मुश्किल हो जाए।
इन पांच सात ऑप्शंस में से एक ऐसी फील्ड
को चुनो जिसमें आपको सबसे ज्यादा फ्लो
महसूस होता है जिसमें आपको सबसे ज्यादा
एक्साइटमेंट महसूस होती है। अब पॉइंट आता
है स्किल्स बिल्ड करने का। ये आप YouTube
ट्यूटोरियल्स के थ्रू कर सकते हो या
ऑनलाइन कोर्सेज के थ्रू कर सकते हो। यहां
डकवर्थ की रिसर्च याद रखो। ग्रिट इक्वल्स
टू पैशन प्लस परवेयरेंस। यही वो फेज है
जहां ग्रिट बनती है। पहले छ महीने
एक्साइटिंग थे। लेकिन अब ग्राइंड का समय
आएगा। यही वह पॉइंट है जहां पर ज्यादातर
लोग छोड़ देते हैं काम करना क्योंकि टिकते
नहीं लेकिन अगर आप सही में पैशनेट हो अपने
काम के बारे में तो आपका डडीकेशन बना रहना
चाहिए। चाहे कुछ फेलियर्स देखने को मिले
चाहे बीच में अड़चनें आए। कभी कबभार मन ना
करे काम करने का। यह सब नॉर्मल चीजें हैं।
इवन मैं भी जिन चीजों के बारे में सबसे
ज्यादा पैशनेट हूं। उन कामों में भी कभी
कबभार ऐसी फीलिंग आती है कि आज मन नहीं कर
रहा। अब मैं बोर हो गया हूं यह करके।
लेकिन ऐसे समय में ही आपको बने रहना है।
डेडीकेशन जरूरी है। याद रखो ग्रिट पैदाइशी
नहीं होता। यह बनता है एग्जैक्टली इसी फेज
में। कम से कम 6 महीने लगाओ एक्सेल करने
में। और इस स्टेप के बाद जब एक साल पूरा
हो जाएगा मुझे पूरा यकीन है कि आप जिस काम
को पसंद करते हो, आप जिस काम के बारे में
पैशनेट हो, जिस काम में अच्छे हो, उससे
फिर साइड इनकम भी कमा पाओगे। नेहा ने
Zomato पर रजिस्टर किया। अमित ने एc पर
लिस्टिंग करी, Instagram पर पेज बनाया।
सोशल मीडिया के थ्रू आज के दिन काफी आसान
हो गया है अपने पेजेस बनाना जहां पर आप
अपनी स्किल को शो ऑफ कर सकते हो। लोगों को
अपनी चीजें बेच सकते हो। जब साइड इनकम
सैलरी का 30 से 50% पहुंच जाए तब आप
ट्रांजिशन की प्लानिंग शुरू कर सकते हो।
तब आप फाइनली डिसाइड कर सकते हो कि कैसे
अपनी टॉक्सिक जॉब को छोड़ना है और अपने
सपनों की जिंदगी जीनी है।
यहां पर एक इंपॉर्टेंट चीज मैं यह नहीं कह
रहा कि हर किसी को एंटरप्रेन्योर बनना है।
अगर आपको टीचिंग पसंद है तो आप सरकारी
टीचर बनकर भी अपने पैशन को फॉलो कर सकते
हो। अगर आप सेम फील्ड के अंदर बेटर कंपनी
ढूंढना चाहते हो। वो भी वैलिड है। पैशन का
मतलब हमेशा स्टार्टअप बनाओ नहीं होता।
जापान में एक कांसेप्ट है ई की गाय का।
इसका मतलब है वो चीज जिसके लिए सुबह उठने
का मन करे। जापान के ओकिनावा में जहां
दुनिया के सबसे ज्यादा 100 साल से ऊपर के
लोग रहते हैं उनकी लैंग्वेज में
रिटायरमेंट का कोई शब्द ही नहीं है।
क्यों? क्योंकि उनके पास ई की गाय है। एक
पर्पस जो उनको जिंदा रखता है। रिसर्च
दिखाती है कि जो लोग ई की गाय को
प्रैक्टिस करते हैं, उनके अंदर हार्ट
अटैक्स का रिस्क बहुत कम हो जाता है। यह
लोग बहुत लंबी उम्र जीते हैं और यह ई की
गाय बनता है चार चीजों के इंटरसेक्शन से।
पहला वो जो आपको करना पसंद है। व्हाट यू
लव। दूसरा वो जिसमें आप अच्छे हैं। व्हाट
यू आर गुड एट, व्हाट यू एक्सेल एट। तीसरा
वो जिसकी दुनिया को जरूरत है। व्हाट द
वर्ल्ड नीड्स और चौथा वो जिसके लिए लोग
पैसे दे। व्हाट यू कैन बी पेड फॉर। अगर आप
एक ऐसा काम ढूंढ लेते हो जो इन चारों
कंडीशंस को सेटिस्फाई करें तो इसका मतलब
है कि आपको अपना एक ही गाय मिल चुका है।
जैसे कि मेरे केस में मेरा एक ही गाय है
वीडियोस बनाना। यह जो वीडियोस मैं आपके
लिए बना रहा हूं, मुझे यह वीडियोस बनाने
बहुत पसंद है। मैं इस काम में ठीक-ठाक भी
हूं, अच्छा भी हूं और कह सकते हो कि
दुनिया को इसकी जरूरत भी है और ऑफ कोर्स
इससे पैसे भी कमा लेता हूं। लेकिन नोट
करने वाली बात यह है कि पहली दो चीजें
पैदाइशी नहीं आई है मेरे अंदर। मैं बचपन
से पैदा नहीं हुआ था कि बचपन से ही मुझे
वीडियोस बनाने का शौक आ गया और मैं उसमें
अच्छा हो गया। आप अगर मेरे 10 साल पुराने
वीडियोस देखोगे YouTube पे तो आपको दिख
जाएगा कि क्वालिटी में कितना जमीन आसमान
का अंतर है। मुझे यह चीज पसंद आई क्योंकि
मैंने एक्सप्लोर किया। मैंने ढेर सारी
अलग-अलग चीजें ट्राई करी और यह बाय चांस
एक चीज ऐसी निकल गई। और मैं इस चीज में
अच्छा बना क्योंकि मैंने फ्लो स्टेट को
एक्सपीरियंस किया। ग्रिड था। मैं लगा रहा
इस काम में पैशन [संगीत] के साथ। प्रॉब्लम
यह है कि लोग इस इकी गाय के डायग्राम को
देखते हैं और इसे सॉल्व करने बैठ जाते
हैं। इस डायग्राम में कुछ सॉल्व करने का
नहीं है। इकी गाय को डिस्कवर नहीं किया
जाता। इकी गाय को बनाया जाता है। नेहा को
पहले दिन से नहीं पता था कि केक बेकिंग
उसका एक ही गाय है। 14 महीने बाद पता चला।
अमित को पहले दिन से नहीं पता था कि वुड
कार्विंग उसका एक ही गाय है। उसे एक साल
बाद पता चला। अब मैंने आपको पूरा ए टू जेड
प्लान डिटेल में बता दिया है। क्या बहाना
है आपके पास? कुछ लोग कहेंगे यार मेरी तो
उम्र हो गई है। यह बचपन में किया होता तो
बेटर होता। लेकिन जानते हो क्या? करियर
चेंज की एवरेज एज ग्लोबली है 39 इयर्स। 39
साल नेहा ने 34 में शुरू किया था। वो
सोचती है कि काश 24 में किया होता। लेकिन
34 में करना 44 में करने से बेटर है।
रिसर्च यह दिखाती है कि चाहे किसी भी उम्र
में अपना करियर चेंज करो। अगर आपको अपना
पैशन मिल गया तो आप जिंदगी में ज्यादा
सेटिस्फाइड रहोगे। अब कुछ लोग यहां बहाना
देंगे कि पेरेंट्स नहीं मानेंगे। इसीलिए
तो मैंने वीकेंड रूल बताया। पहले रिजल्ट्स
दिखाओ फिर बात करो। अमित ने जब अपनी पहली
सेल करी $47 की तब उसने मां को बताया और
मां ने पूछा यह डॉलर में है। उसके बाद कोई
सवाल नहीं आया। पेरेंट्स को दिखाना पड़ता
है। कन्विंस नहीं करना पड़ता। अब तीसरा
बहाना है कि पैसे नहीं है। लेकिन मैंने जो
लंबी पीडीएफ की शीट दी है उसमें से
ज्यादातर करियर्स ऐसे हैं जिसमें कोई पैसा
नहीं लगता एक्सप्लोर करने में। बाकी सब
में बहुत कम पैसे से शुरुआत की जा सकती
है। नेहा ने घर के अवन से शुरू किया है।
एक्रेलिक पेंट सेट सिर्फ ₹300 का होता है।
कंटेंट राइटिंग के लिए सिर्फ लैपटॉप चाहिए
होता है। मुझे नहीं लगता इस वीडियो के बाद
एक भी बहाना रह जाएगा आपके पास अपना पैशन
ना फॉलो करने का। और रिसर्च में दोस्तों
एक और बड़ी इंटरेस्टिंग चीज पता चलती है
जो मैं देखकर भी काफी हैरान हो गया। सैन
फ्रांसिस्को यूनिवर्सिटी की एक स्टडी
बताती है कि [संगीत] जो लोग साइड पैशन
प्रोजेक्ट रखते हैं उनकी प्राइमरी जॉब
परफॉर्मेंस भी इंप्रूव होती है।
क्रिएटिविटी बढ़ती है। प्रॉब्लम सॉल्विंग
बेटर होती है। बर्न आउट कम होता है। मतलब
यह आइदर और का ऑप्शन नहीं है कि नौकरी
चुनो या पैशन चुनो। पैशन प्रोजेक्ट
एक्चुअली में आपकी नौकरी को भी बेटर बनाता
है। अगर आपके अंदर भी एक आवाज उठती है कि
मेरी जिंदगी में मुझे कुछ और भी करना
चाहिए था तो प्लीज उस आवाज को दबाइए मत।
85% लोग उस आवाज को दबा देते हैं। रोज
सुबह अलार्म बजेगा और फिर से वही रूटीन
में घुस जाएंगे। लेकिन अगर आपने वीडियो
यहां तक देखा है इसका मतलब है कि आपके
अंदर वो बेचैनी अभी भी जिंदा है। उस
बेचैनी को जिंदा रखिए। वो आपकी सबसे
वैल्यूएबल चीज है। हम एक ऐसे देश में रहते
हैं जहां 65% आबादी 35 साल से कम की है।
दुनिया की सबसे यंग वर्कफोर्स है हमारे
पास। अगर सब के सब सिर्फ यही 10-15 सेफ
करियर ऑप्शंस में घुस जाएंगे तो देश कैसे
इनोवेट करेगा? आप अपना पैशन फॉलो करके
सिर्फ अपनी जिंदगी नहीं बदल रहे हैं बल्कि
इस देश का फ्यूचर भी शेप कर रहे हैं। तो
आज रात सोने से पहले इस पीडीएफ को डाउनलोड
कीजिए। अगर आपके घर में प्रिंटर है तो
प्रिंट करा लीजिए। अगर प्रिंटर नहीं है तो
इसे फोन में सेव कर लीजिए। 1 घंटा लगाकर
आपको इन 100 करियर ऑप्शंस की लिस्ट पढ़नी
है और टिक मार्क करना है उन 30 ऑप्शंस को
जिनमें आपको इंटरेस्ट आता है। ऐसे 30
करियर्स की लिस्ट बना लीजिए और इसके बाद
कल से सिर्फ आधा घंटा लगाना है आपको। पहले
करियर को एक्सप्लोर करना शुरू कीजिए। कोई
आपको जज नहीं करेगा। कोई आपको देखेगा
नहीं। फोन पर बस टाइमर लगाओ और चीजों को
एक्सप्लोर करना शुरू करो। जो भी हो चाहे
ड्राइंग हो, कुकिंग, कोडिंग, [संगीत]
सिंगिंग, राइटिंग, बिल्डिंग कुछ भी। यह 45
मिनट सिर्फ आपके हैं और याद रखना 20 घंटे
और 1 महीना बस इतना ही चाहिए शुरू करने के
लिए। अगर इस मुद्दे में और गहराई में जाना
चाहते हो और स्टेप बाय स्टेप गाइडेंस अगर
आप चाहते हो तो पूरी की पूरी एक ई-बुक और
ऑडियो बुक मौजूद है ध्रुवराठी एकडमी पर
भाड़ में जाए [संगीत] वो नौकरी टू हेल विद
दैट जॉब दोनों इंग्लिश और हिंदी में
अवेलेबल है। यह 7 घंटे की ऑडियो बुक है।
एक्सैक्टली इसी चीज पर तो अगले एक महीने
के लिए आपको कास्टेंट मोटिवेशन और सपोर्ट
मिलता रहेगा। और इसका पहला चैप्टर बिल्कुल
फ्री है। तो यहां क्लिक करके अभी सुनना
स्टार्ट कर सकते हो। इसका लिंक नीचे आपको
डिस्क्रिप्शन में भी मिल जाएगा। मिलते हैं
अगले वीडियो में। बहुत-बहुत धन्यवाद।
[संगीत]
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