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26/11 Mumbai Planning & Execution | Operation Black Tornado | How NSG Neutralise Terrorists

38:38HindiTranscribed Jul 25, 2026
0:00

26 नवंबर 2008 की शाम हमेशा की तरह मुंबई

0:03

की सड़कों पर जिंदगी अपनी रफ्तार से चल

0:06

रही थी अपने कल से अनजान हर कोई अपने काम

0:08

में बिजी था किसी ने बुरे सपने में भी

0:11

नहीं सोचा था कि अब से बस कुछ ही घंटे बाद

0:13

मुंबई में ऐसी तबाही होगी जिससे मुंबई शहर

0:16

कभी नहीं भुला पाएगा मुंबई को दहलाने के

0:18

लिए आम कपड़ों में आम दिखने वाले आठ लड़के

0:21

स्पीड बोट से बदवाप में उतरते हैं इतना

0:24

नॉर्मल दिखने के बावजूद भी इन लड़कों को

0:26

देखकर वहां के लोकल लोगों को थोड़ा अजीब

0:29

महसूस होता है इन लोगों में मौजूद भरत

0:31

तमोर नाम के एक आदमी को अजीब लगने के

0:34

साथ-साथ कुछ मिस्टीरियस भी फील हुआ इसलिए

0:36

उन्होंने फौरन सभी लड़कों को रोक कर उनसे

0:38

पूछा कि व यहां क्या कर रहे हैं और कहां

0:41

जा रहे हैं इस सवाल पर पहले तो सभी हिच

0:43

किचा हैं लेकिन फिर कोई खुद को स्टूडेंट

0:46

तो कोई कुछ बताता है लेकिन इतने में उन

0:48

लड़कों में से एक लड़का जोर से चिल्लाता

0:50

हुआ बोलता है कि अपने काम से काम रखो रात

0:53

का वक्त था और ऐसे में एक ही उम्र के आठ

0:56

लड़के कंधों पर दो बड़े-बड़े बैग लेकर

0:58

बिना कुछ बताए वहां से निकल लेते हैं भरत

1:01

को इन लड़कों पर शक होता है जिस कारण वह

1:03

आगे चलकर इस घटना की जानकारी मुंबई पुलिस

1:06

को भी देते हैं लेकिन पुलिस बात को हल्के

1:08

में लेते हुए कोई कारवाही नहीं करती बाद

1:10

में कार्रवाई ना करना ही मुंबई पुलिस की

1:12

सबसे बड़ी गलती साबित होती है अगर समय

1:15

रहते मुंबई पुलिस कोई कार्रवाई करती तो

1:17

शायद मुंबई में मौत का तांडव ना देखने को

1:19

मिलता शायद उस दिन का इतिहास 166 लोगों के

1:23

खून से सना नहीं होता वहां से निकलने के

1:25

बाद सभी लड़के दो-दो के ग्रुप में डिवाइड

1:28

होकर टारगेट की गई लोकेशंस की तरफ तरफ

1:30

निकल पड़ते हैं इन लोकेशंस में सीएसटी

1:32

रेलवे स्टेशन ताजमहल पैलेस होटल लियोपोल्ड

1:35

कैफे और नरीमन हाउस शामिल थे सारी जगह

1:39

वहां से बस कुछ ही दूरी पर थी हालांकि

1:41

समुद्र के रास्ते से आई बोट में आठ नहीं

1:44

बल्कि टोटल 10 लड़के थे जहां 10 में से आठ

1:47

लड़के बोट से उतर करर सड़क के रास्ते

1:49

अपनी-अपनी लोकेशन पर पहुंच रहे थे तो वही

1:51

बाकी के दो लड़के अपनी टारगेट ओबरॉय होटल

1:54

तक पहुंचने के लिए बोट का ही इस्तेमाल

1:56

करते हैं एक तरफ जहां यह लड़के अपने

1:58

मंसूबों को पूरा करने के लिए तेजी से

2:01

अपनी-अपनी लोकेशंस की ओर बढ़ रहे होते हैं

2:03

तो वहीं दूसरी ओर मुंबई हमेशा की तरह अपनी

2:06

धुन में बस चलती जा रही थी लोग रोज की तरह

2:08

कामकाज में बिजी थे लेकिन अचानक मुंबई

2:11

गोलियों की तड़पड़ा हट से थर्रा उठती है

2:13

मुंबई के लिए यह आवाजें नहीं नहीं थी

2:15

अंडरवर्ल्ड के गुटों में अक्सर शूटआउट

2:17

होता रहता था थोड़ी बहुत गोलीबारी तो

2:19

मुंबई के लिए आम बात थी लेकिन आज कुछ बड़ा

2:22

हुआ था इतना बड़ा कि जिसकी आवाज ने देश को

2:25

सुन्न करके रख दिया था इस धमाके और

2:27

अंधाधुन गोलीबारी की शुरुआत छत्रपति

2:29

शिवाजी टर्मिनस से होती है छत्रपति शिवाजी

2:32

टर्मिनस मुंबई के सबसे बिज एस्ट रेलवे

2:34

स्टेशन में से एक है उस दिन पटना जाने

2:36

वाली ट्रेन कुछ घंटों की देरी से चल रही

2:38

थी यात्रियों को यह कहां पता था कि यह

2:41

देरी उनके लिए जानलेवा साबित होने वाली है

2:43

इस्माइल खान और अजमल कसाब नाम के दो लड़के

2:46

एक साथ स्टेशन पर पहुंचते हैं और ऐसे

2:48

खौफनाक मंजर को जन्म देते हैं जिसका

2:51

अंदाजा कोई नहीं लगा सकता था यहां पहुंचकर

2:53

जहां कसा पागलों की तरह हंसते हुए ak47 से

2:57

ताबड़ तोड़ गोलियां चलाने लगता है तो भाई

2:59

इस्माइल चार चारों तरफ हैंड ग्रेनेड

3:01

फेंकता है किसी को अंदाजा नहीं था कि

3:03

क्यों और किस कारण उन पर ऐसा हमला किया जा

3:05

रहा है चारों ओर बस गोलीबारी और चीखने

3:08

चिल्लाने की आवाजें गूंज रही थी लगातार

3:10

गोलियों की आवाज और बॉम धमाकों से लोग डर

3:13

कर इधर-उधर भागने लगते हैं जिसको जहां जगह

3:16

मिलती है वो वही छुप जाता है अफरातफरी और

3:18

चीख पुकार के बीच दोनों इस तरह फायरिंग कर

3:21

रहे थे जैसे मानो कोई वीडियो गेम खेल रहा

3:23

हो इन दोनों आतंकियों का सिर्फ एक ही मकसद

3:26

था और वो था मुंबई के सबसे बिजय रेलवे

3:29

स्टेशन छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर अधिक से

3:31

अधिक लोगों की मौत स्टेशन पर काम करने

3:34

वाले लोगों और रेलवे पुलिस को कुछ समझ

3:36

नहीं आ रहा था कि इस सिचुएशन को किस तरह

3:38

हैंडल किया जाए फिर भी दोनों आतंकियों को

3:41

रोकने के लिए रेलवे पुलिस हर एक कोशिश

3:43

करती है लेकिन नाकाम रहती है दरअसल दोनों

3:46

लड़के पहले से ही प्लान बनाकर आए थे और

3:48

उनके पास हर तरह के हथियार मौजूद थे लेकिन

3:51

रेलवे पुलिस के पास केवल उनकी ड्यूटी

3:53

रिवॉल्वर ही मौजूद थी जिस कारण वो इनका

3:55

सामना नहीं कर पाते और वही शहीद हो जाते

3:58

हैं लेकिन इसी बीच रेलवे स्टेशन के ही एक

4:00

कर्मचारी विष्णु दत्ताराम अपनी जान की

4:02

परवाह ना करते हुए अनाउंसमेंट करके सभी

4:05

पैसेंजर्स को आगाह करते हैं कि वह फॉरेन

4:07

स्टेशन को छोड़कर अपनी जान बचाए

4:09

अनाउंसमेंट सुनते ही कई लोग अपनी जान

4:11

बचाकर भागने में कामयाब रहे लेकिन

4:13

आतंकियों का हमला इतना भयानक था कि केवल

4:16

एक घंटे में 58 लोग अपनी जिंदगी गवा देते

4:19

हैं तो वही 104 लोग बुरी तरह घायल हो जाते

4:22

हैं जब सीएसटी रेलवे स्टेशन पर गोलीबारी

4:25

चल रही होती है तभी मुंबई पुलिस को इस

4:27

घटना की इंफॉर्मेशन मिल जाती है लेकिन

4:29

इससे पह पहले की पुलिस कोई एक्शन लेती एक

4:31

और खूनी खेल खेला जाता है और इस बार

4:34

लोकेशन अलग थी मुंबई के फेमस लियोपोल्ड

4:36

कैफे में उन्हीं 10 में से दो आतंकी शोएब

4:39

और नाजिर एकदम सीएसटी रेलवे स्टेशन जैसी

4:42

ही घटना को अंजाम देते हैं लियोपोल्ड कैफे

4:44

में अपनी शाम को हसीन बनाने में डूबे हुए

4:46

लोगों को आने वाले पल की कोई खबर नहीं थी

4:49

पार्टियों में मशगूल लोगों में से किसी को

4:51

भी अंदाजा नहीं था कि यह रात उनके लिए

4:53

आखिरी रात साबित होगी वो खुशी और जश्न के

4:56

माहौल में खोए हुए थे कि तभी दो जवान

4:59

लड़के हाथों में हथियार लिए कैफे में बैठे

5:01

हर एक शख्स के खून के प्यासे बन जाते हैं

5:04

लियोपोल्ड कैफे मुंबई का एक बेहद जानामाना

5:07

कैफे है जहां लोगों की हमेशा भीड़ रहती है

5:09

इस कैफे पर फॉरेनर्स का भी हमेशा से आना

5:11

जाना रहा है कैफे की पॉपुलर और फॉरेनर्स

5:14

की प्रेजेंस के कारण ही इस कैफे को टारगेट

5:16

किया जाता है दोनों आतंकी लियोपोल्ड कैफे

5:19

में घुसते ही कई राउंड फायरिंग करते हैं

5:21

अचानक से की गई अंधाधुन फायरिंग से कैफे

5:24

में बैठे कई लोग चाहकर भी अपनी जान नहीं

5:26

बचा पाते जिस कारण इस हमले में कई विदेशी

5:29

और भारतीय लोग मारे जाते हैं मुंबई में

5:31

लगातार दो अटैक्स होने के बाद भी बात यहां

5:34

नहीं

5:43

थमतीकिरा

5:45

रुख करते हैं जहां पहले से ही इनके दो

5:48

गैंग मेंबर पहुंच चुके थे लगातार हो रहे

5:50

अटैक से चैन की नींद सो रहे लोग जाग जाते

5:53

हैं लोगों को उनके घर में ही रहने की सलाह

5:55

दी जाती है सब कुछ इतना अजीब और तेजी से

5:58

हो रहा था कि किसी को सोच सने और संभलने

6:00

तक का वक्त नहीं मिल पाता हर गुजरते मिनट

6:03

के साथ मीडिया में अटैक की न्यू हेडलाइन

6:05

फ्लैश कर रही थी चंद घंटों पहले शुरू हुआ

6:07

यह हमला ऐसा विकराल रूप ले लेता है कि हर

6:10

तरफ से सिर्फ गोलीबारी और बॉम ब्लास्ट की

6:13

खबरें ही सामने आ रही थी अपनी तेजी के लिए

6:15

मशहूर मुंबई कुछ समय के लिए रुकसा जाता है

6:18

शुरुआती दौर में मुंबई पुलिस को यह सब एक

6:20

गैंग वॉर लगता है लेकिन कुछ ही समय में

6:22

पुलिस को भी समझ आ जाता है कि यह कोई गैंग

6:25

वॉर नहीं बल्कि एक फुल्ली प्लान टेररिस्ट

6:27

अटैक है मुंबई में उस दिन एक ही समय पर कई

6:30

जगह हमले हो रहे थे जब सीएसटी स्टेशन और

6:32

लियोपोल्ड कैफे में हमला हो रहा था तभी

6:35

आतंकियों का एक और ग्रुप ताज होटल को

6:37

निशाना बना रहा था ताज होटल पर अटैक की

6:39

इतनी जबरदस्त प्लानिंग की गई थी कि जिस

6:42

समय ताज होटल पर हमला किया जाता है उस समय

6:44

होटल के मैक्सिमम रूम्स बुक थे हमले के

6:47

वक्त यूरोपियन पार्लियामेंट कमेटी के कई

6:49

डेलिगेट्स भी होटल में मौजूद होते हैं

6:52

इत्तेफाक से उस दिन गौतम अडानी भी ताज

6:54

होटल में ही मीटिंग कर रहे होते हैं

6:56

हालांकि अपनी मीटिंग खत्म करके जैसे ही

6:58

अडानी बाहर की ओर जाने लगते हैं वैसे ही

7:01

उनकी टीम उन्हें एक और मीटिंग के बारे में

7:02

इफॉर्म करती है जिस कारण बाहर निकलने के

7:05

बजाय वह वापस से मीटिंग रूम में चले जाते

7:07

हैं एक तरफ अडानी मीटिंग के लिए जाते हैं

7:10

तो दूसरी ओर अब तक आतंकियों का तीसरा

7:12

ग्रुप हाफिज और जावेद ताज होटल के मेन

7:15

एंट्रें से होटल में घुस जाते हैं उनके

7:17

होटल में एंटर करते ही होटल ताज गोलियों

7:20

की तड़ तड़ा हट और बम के धमाकों से गूंज

7:22

उठता है जैसे ही अडानी की टीम को इस हमले

7:25

के बारे में पता चलता है अडानी को तुरंत

7:27

किचन के जरिए बेसमेंट में ले जा जाया जाता

7:30

है जहां वह रात भर रहते हैं और सुबह

7:32

उन्हें मार्कोस कमांडो सेफली रेस्क्यू कर

7:34

लेते हैं अडानी तो सेफ हो चुके थे लेकिन

7:37

अभी भी यहां हजारों लोगों की जान दाव पर

7:39

लगी थी दोनों आतंकी लगातार फायरिंग कर रहे

7:41

थे गोलीबारी की आवाज सुनकर हर तरफ डर का

7:44

माहौल था सबसे पहले इन दोनों आतंकियों ने

7:47

मेन गेट पर ड्यूटी कर रहे गार्ड की हत्या

7:49

कर दी उसके बाद होटल के ग्राउंड फ्लोर पर

7:51

जो भी लोग थे उनमें से कुछ को मार दिया और

7:54

कुछ को हॉस्टेस बना लिया ग्राउंड फ्लोर के

7:56

बाद आतंकी फायरिंग करते हुए सीढियों से

7:59

ऊपर के फ्लोर्स को खंगालने लगते हैं

8:00

हालांकि इस मौके का फायदा उठाकर मुंबई

8:03

पुलिस अलग-अलग गेट से कई बड़े अधिकारियों

8:05

को सेफली रेस्क्यू कर लेती है दों के करीब

8:08

लोग खुद होटल की खिड़कियों को तोड़कर

8:10

बेडशीट और पर्दों के सहारे अपनी जान बचाने

8:13

में सफल होते हैं यहां पर आतंकियों का

8:15

मोटिफ किसी बड़े बिजनेसमैन या फॉरेन

8:17

डेलिगेट्स को हॉस्टेस बनाने का था ताकि

8:19

इसके सहारे वो इंडियन गवर्नमेंट से

8:21

नेगोशिएट कर सके दोनों आतंकी होटल में

8:23

घुसने के साथ ही पहले फिफ्थ फ्लोर पर अटैक

8:26

भी इसलिए ही करते हैं क्योंकि फिफ्थ फ्लोर

8:28

पर बिजनेस सेंटर था उन्हें लगा था कि इस

8:30

फ्लोर पर उन्हें कोई ना कोई बड़ा आदमी

8:32

जरूर मिल जाएगा हालांकि अगर गौतम अडानी को

8:35

रेस्क्यू नहीं किया जाता तो इनके मंसूबे

8:37

पूरे हो भी सकते थे लेकिन फिफ्थ फ्लोर पर

8:40

किसी बिग पर्सनालिटी के ना मिलने पर दोनों

8:42

आतंकी फायरिंग करते हुए सिक्स्थ फ्लोर पर

8:45

चढ़ जाते हैं और वहां अपना कंट्रोल सेंटर

8:47

बनाने के लिए एक कमरा तलाशने लगते हैं

8:49

उनकी नजर रूम नंबर 520 पर पड़ती है जो

8:52

अंदर से बंद था बहुत खटखटाने के बाद भी

8:54

गेट नहीं खुलता तो आतंकी हथियारों से

8:57

मारकर गेट खोल देते हैं और अंदर घुस घुस

8:59

जाते हैं दरअसल उस कमरे में कॉरपोरेशन

9:01

बैंक के फॉर्मर चेयरमैन के आर रामामूर्थी

9:04

मौजूद थे होटल में गोलियों की बौछार और

9:07

लोगों की चीख पुकार से उन्हें भी इस हमले

9:09

के बारे में पता चल गया था इसलिए वह अपने

9:11

रूम के गेट को बंद कर वॉशरूम में छुप जाते

9:14

हैं लेकिन कमरे का गेट खुलते ही उनकी

9:16

धड़कनों की रफ्तार एकदम से तेज हो जाती है

9:19

और जिसका डर था वही होता है वॉशरूम में

9:21

छुपे रामामूर्ति आतंकियों की नजर में आ

9:23

जाते हैं लेकिन आतंकी उनको मारने के बजाय

9:26

उन्हें वही बंधक बना लेते हैं ताज होटल पर

9:28

अटैक के पीछ ही विले पार्ले और वाड़ी बंदर

9:31

में चलती टैक्सी में तेज आवाज के साथ बॉम

9:33

ब्लास्ट होता है और आसमान धुए से भर जाता

9:36

है टैक्सी में ट्रेवल कर रहे सभी लोग मारे

9:38

जाते हैं बॉम ब्लास्ट इतना जोरदार होता है

9:41

कि आसपास की कई बिल्डिंग्स में आग लग जाती

9:43

है और उससे भी कई लोगों की मौत हो जाती है

9:46

टैक्सी में बॉम लगाने का काम भी उन 10

9:48

लोगों में से ही कुछ टेररिस्ट का होता है

9:50

दरअसल आतंकी फेमस और क्राउडेड जगहों को

9:53

टारगेट तो कर ही रहे थे इसके अलावा उनका

9:55

टारगेट वो टैक्सी भी होती है जिनसे वो एक

9:58

जगह से दूसरी जगह तक जा रहे थे आतंकी

10:01

टैक्सी में ट्रेवल करते समय ड्राइवर को

10:03

बातों में उलझा करर उनमें बॉम लगा देते और

10:05

फिर खुद टैक्सी से उतर जाते टैक्सी ब्लास

10:08

के जरिए भी व मुंबई को दहला रहे थे ताज

10:11

होटल में जब दोनों आतंकी सिक्सथ फ्लोर पर

10:13

अपना कंट्रोल रूम बना रहे थे तभी उनके दो

10:15

और साथी नाजिर और शोएब भी ताज होटल पहुंच

10:19

जाते हैं होटल पहुंचते ही ये दोनों आतंकी

10:21

पागलों की तरह अंधाधुन फायरिंग करते हुए

10:23

कई लोगों को मार देते हैं और चार लोगों को

10:26

हॉस्टेस बनाकर रूम नंबर 520 में ले जाते

10:29

ते हैं अब इस रूम में चार आतंकी और पांच

10:31

हॉस्टेस होते हैं इस वक्त कोई आतंकी

10:33

लगातार किसी से फोन पर आगे के हमले को

10:36

लेकर बात कर रहा होता है तो कोई आतंकी

10:38

पांचों बंधकों की आईडी को

10:42

[संगीत]

10:46

google2 बनाकर नेगोशिएशन किया जा सके

10:49

लेकिन पकड़े हुए लोगों में कोई भी बड़ा

10:51

नाम नहीं मिलने पर आतंकी कमरे की चादरों

10:54

और पर्दों में आग लगा देते हैं और रूम को

10:56

लॉक करके खुद बाहर आ जाते हैं आग के धुए

10:59

से हॉस्टेस का दम खुट रहा होता है लेकिन

11:02

किसी भी तरह वह एक दूसरे को आजाद करके

11:04

बेडशीट्स के सहारे कमरे की खिड़कियों से

11:06

नीचे उतर करर अपनी जान बचाने में कामयाब

11:09

हो जाते हैं यह पांचों हॉस्टेस तो बच जाते

11:11

हैं लेकिन ताज होटल में अब तक 31 लोग अपनी

11:14

जान गवा चुके थे एक तरफ ताज होटल में आतंक

11:17

मचा हुआ था तो वहीं दूसरी तरफ आतंकियों की

11:20

चौथी टीम के नाजिर और बाबर इमरान नरीमन

11:23

हाउस में घुसकर वहां मौजूद लोगों को

11:25

हॉस्टेस बना लेते हैं दरअसल नरीमन हाउस पर

11:28

इन आतंक का अटैक करने का एक अलग मोटिव

11:31

होता है पांच फ्लोर की ये बिल्डिंग जुश

11:33

ऑर्गेनाइजेशन के द्वारा 2 साल पहले ही

11:35

खरीदी गई थी जिस वजह से रेमन हाउस एक

11:38

यहूदी सेंटर होता है यहां कई यहूदी आकर

11:40

रुकते और प्रेयर करते इस जगह पर इजराइली

11:42

प्रीस्ट राबी गैब्रियल होल्स बर्ग और उनकी

11:45

पत्नी रिफ का अपने बेटे मोशे के साथ रहते

11:48

थे जूस सेंटर होने की वजह से आतंकियों का

11:50

प्लान यहां पर किसी को मारने की बजाय

11:53

उन्हें बंक बनाने का होता है उनका मोटिव

11:55

था कि वह सभी इजराइली सिटीजंस को हॉस्टेस

11:58

बनाकर इजराइली गवर्नमेंट से नेगोशिएट करते

12:00

जिसके चलते इजराइल भारत पर अपने सिटीजंस

12:03

को बचाने के लिए दबाव बनाता इस तरह

12:05

आतंकियों का मकसद इजराइल और इंडिया के

12:07

रिलेशन में फूट डालने का भी था इसलिए

12:10

दोनों आतंकी यहां रह रहे गैब्रियल और उनकी

12:12

पत्नी रिवका पर इजराइल की एंबेसी से बात

12:15

करवाने के लिए प्रेशर बनाते हैं लेकिन जब

12:17

कोई बात नहीं बनती तो आतंकी फ्रस्ट्रेट

12:19

होकर नरीमन हाउस को भी खून से रंग देते

12:21

हैं इस हमले में गैब्रियल और उनकी

12:24

प्रेग्नेंट वाइफ समेत नौ लोग अपनी जान गवा

12:26

देते हैं सीएसटी स्टेशन लियोपोल्ड कैफे

12:29

ताज होटल नरीमन हाउस और टैक्सी बॉम

12:32

ब्लास्ट्स जहां इतना सब हो रहा था तो वहीं

12:34

आतंकियों का पांचवां ग्रुप अब्दुल रहमान

12:37

और फहद उल्ला ओबराय होटल के पास बोट को

12:40

समुंद्र के किनारे लगाते हैं और होटल की

12:42

लॉबी में अंधाधुन फायरिंग करना शुरू कर

12:44

देते हैं यहां पर भी आतंकियों का अटैक का

12:46

तरीका सेम होता है ये दोनों आतंकी भी बाकी

12:49

आतंकियों की तरह ओय होटल में गोलीबारी

12:52

करते हैं गोलियों की आवाज से कई लोग

12:54

जैसे-तैसे बचकर वहां से निकल जाते हैं

12:56

लेकिन इस दौरान आतंकी होटल के दो स्टाफ

12:59

मेंबर जॉर्डन और प्रदीप को बंदी बना लेते

13:02

हैं आतंकी पहले जॉर्डन को पकड़कर उसे

13:04

फोर्स करते हैं कि वह फर्नीचर और पर्दों

13:06

पर अल्कोहल डालकर उनमें आग लगाए लेकिन ऐसा

13:09

करते हुए जॉर्डन के हाथ कांपने लगते हैं

13:12

जिसे देखकर एक आतंकी गुस्से में आ जाता है

13:14

और जॉर्डन को गोली मार देता है जॉर्डन के

13:17

मरते ही आग लगाने का काम प्रदीप को सौंपा

13:19

जाता है प्रदीप मौत के डर से जैसे-तैसे

13:22

वहां मौजूद पर्दों और फर्नीचर में आग लगा

13:24

देता है इसके बाद प्रदीप से वीआईपी लोगों

13:27

के बारे में आतंकी पूछताछ कर करते हैं

13:29

यहां प्रदीप चालाकी दिखाते हुए बताता है

13:31

कि वीआईपी ऊपर वाले फ्लोर पर होंगे इसलिए

13:34

लिफ्ट से जाना पड़ेगा प्रदीप और दोनों

13:36

आतंकी लिफ्ट की तरफ बढ़ते हैं लिफ्ट के

13:39

खुलते ही प्रदीप आतंकियों को चकमा देकर

13:41

अकेला लिफ्ट में घुस जाता है और नीचे जाने

13:44

का बटन दबाकर लिफ्ट को बंद कर देता है यह

13:46

सब इतना अचानक से हुआ था कि आतंकियों को

13:49

कुछ समझ नहीं आया लेकिन इस चकमे से आतंकी

13:51

बहुत गुस्से में आ जाते हैं और पहले लिफ्ट

13:54

और फिर चारों तरफ पागलों की तरह फायरिंग

13:56

करने लगते हैं इस हमले में 30 से ज्यादा

13:59

लोग अपनी जान गवा देते हैं एक ही दिन एक

14:01

ही वक्त पर अलग-अलग जगह से अटैक्स की खबर

14:04

सुनकर महाराष्ट्र पुलिस क्लूलेस हो जाती

14:06

है कुछ देर के लिए उन्हें समझ ही नहीं आता

14:09

कि उन्हें क्या करना चाहिए हालांकि

14:11

गोलीबारी की सूचना पाते ही मुंबई एटीएस के

14:14

हेड हेमंत करकरे जल्द ही अपनी टीम तैयार

14:16

कर आतंकियों का पीछा करते हैं वो पहले

14:18

सीएसटी रेलवे स्टेशन पहुंचते हैं पर वहां

14:21

तब तक खून का खेल खेला जा चुका था तभी

14:23

उन्हें फोन पर पता चलता है कि दो आतंकी

14:26

बंदूकें लेकर कामा हॉस्पिटल के पास वाली

14:29

में देखे हैं यह क्लू मिलते ही हेमंत

14:31

करकरे अपनी गाड़ी को कामा हॉस्पिटल की तरफ

14:33

मोड़ देते हैं इस गाड़ी में हेमंत करकरे

14:36

के साथ एसीपी अशोक कामटे विजय सालसकर हेड

14:39

कांस्टेबल अरुण जादव और तीन सिपाही भी

14:42

मौजूद थे गाड़ी जैसे ही कामा हॉस्पिटल की

14:44

गली के पास पहुंचती है सीएसटी पर हमला

14:47

करने वाले कसाब और स्माइल एकदम से गाड़ी

14:49

के सामने आ जाते हैं और गाड़ी पर अंधाधुन

14:52

फायरिंग करते हुए वो कुछ ही मिनट्स में

14:54

ak47 की दो मैगजीन पुलिस की गाड़ी पर खाली

14:58

कर देते हैं इस दौरान पुलिस की तरफ से भी

15:00

गोलीबारी होती है जिसके चलते कसाब के

15:02

हाथों में गोली लग जाती है लेकिन आतंकियों

15:05

के ताबड़तोड़ हमले ने पुलिस की गाड़ी को

15:07

छल्ली कर दिया था पुलिस की तरफ से फायरिंग

15:10

रुकते ही कसाब और स्माइल गाड़ी की तरफ

15:12

बढ़ते हैं और कंफर्म करते हैं कि कोई

15:14

पुलिस वाला जिंदा तो नहीं बचा इस गोलीबारी

15:17

में हेमंत करकरे सहित कई पुलिसकर्मी शहीद

15:19

हो गए थे दोनों आतंकियों ने जब गाड़ी में

15:22

आगे पीछे देखकर पक्का कर लिया कि कोई भी

15:24

जिंदा नहीं है तो वो विजय सालसकर हेमंत कर

15:27

करे और अशोक कामटे की बॉडीज को नीचे

15:29

उतारते हैं और ड्राइवर वाली सीट को खाली

15:31

कर देते हैं आतंकी पीछे की सीट पर बैठे

15:34

पुलिस कर्मियों की डेड बॉडीज को भी गाड़ी

15:36

से उतारना चाहते थे लेकिन पीछे का डोर ना

15:38

खुलने की वजह से टाइम ना वेस्ट करते हुए

15:41

वो आगे वाली सीट पर बैठकर गाड़ी को लेकर

15:44

वहां से मालाबार हिल की तरफ निकल जाते हैं

15:46

हालांकि गोलीबारी के कारण गाड़ी की हालत

15:48

काफी खराब हो जाती है गाड़ी के टायर्स में

15:51

गोली लगने की वजह से कुछ दूर चलते ही

15:53

गाड़ी पंचर हो जाती है दोनों आतंकी गाड़ी

15:56

को चेंज करने का सोचते हैं कि तभी उन्हें

15:58

सामने से एक स्ािल

16:06

बार हिल की तरफ बढ़ जाते हैं इस वक्त दो

16:09

चीजें अच्छी हुई एक तो आतंकी स्ािल को

16:13

मारना भूल जाते हैं और दूसरा यह कि

16:16

आतंकियों का ध्यान नहीं जाता कि जिस पुलिस

16:18

कार में बैठकर वो यहां तक आए थे इसके पीछे

16:21

की सीट पर हेड कांस्टेबल अरुण जादव अभी भी

16:24

जिंदा थे उनके बस कंधे पर गोली लगी थी और

16:26

वह मरने का नाटक करते हुए पूरे पूरे

16:29

रास्ते स्माइल और कसाब की बातें सुनते हुए

16:31

आए थे इसलिए आतंकियों ने जैसे ही पुलिस की

16:33

गाड़ी को खाली किया अरुण जाधव ने फौरन

16:36

पुलिस कंट्रोल रूम को फोन करके आतंकियों

16:38

की डायरेक्शन और डेस्टिनेशन के बारे में

16:40

इंफॉर्मेशन

16:46

लगा दिए जाते हैं और इन बैरिकेडिंग के साथ

16:49

पुलिस फोर्स भी जगह-जगह पर तैनात हो जाती

16:51

है पुलिस की हरकत में आने के कारण अब

16:54

चारों तरफ से दोनों आतंकी पुलिस वालों से

16:56

घिर जाते हैं भागने का एक भी मौका ना देख

16:59

वो बैरिकेड तोड़ने की कोशिश करते हैं एकदम

17:01

से दोनों तरफ से ताबड़तोड़ फायरिंग होने

17:04

लगती है लेकिन पुलिस के आगे दोनों आतंकी

17:06

कहीं नहीं टिक पाते जब आतंकियों की तरफ से

17:08

गोली चलना बंद हो जाती है तो पुलिस को

17:11

उनके मर जाने का आभास होता है लेकिन किसी

17:13

की हिम्मत नहीं होती कि कोई आगे बढ़कर

17:15

आतंकियों की मौत की पुष्टि कर सके ऐसे में

17:18

पुलिस कर्मियों की भीड़ को चीरते हुए

17:20

असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर तुकाराम ओंबले

17:22

आगे आते हैं और सबसे बहादुरी का काम करते

17:25

हैं वो अनाम होते हुए भी आतंकियों की ओर

17:27

बढ़ते हैं लेकिन उनके पास पहुंचते ही एक

17:30

आतंकी उठ खड़ा होता है और जैसे ही वह गोली

17:32

चलाने के लिए बंदूक आगे करता है तुकाराम

17:35

बंदूक को कस कर पकड़ लेते हैं और इंश्योर

17:37

करते हैं कि आतंकी भाग ना पाए उनके इस

17:40

एक्शन से आतंकी गुस्से में 23 गोलियां

17:42

उनके शरीर में दाग देता है जिस कारण

17:45

तुकाराम ओंबले वहीं पर शहीद हो जाते हैं

17:47

हालांकि शहीद तुकाराम ओंबले का बलिदान

17:49

व्यर्थ नहीं जाता जहां एक आतंकी पहले ही

17:52

मारा जा चुका था तो वही उनकी बहादुरी के

17:54

कारण दूसरे आतंकी को जिंदा पकड़ लिया जाता

17:57

है पकड़े गए आतंकी का नाम नाम कसाब था जो

18:00

बाद में इन्वेस्टिगेशन के लिए बहुत काम

18:01

आता है लेकिन अभी भी आठ आतंकी बाकी थे जो

18:04

मुंबई में आतंक मचा रहे होते हैं इनके

18:07

अगले एक्शंस के बारे में जानने से पहले यह

18:09

जानते हैं कि आखिर ये अटैक्स हुए ही क्यों

18:12

ये अटैक्स किसने करवाए और कौन इन सभी

18:14

हमलों का मास्टरमाइंड था दरअसल 6 दिसंबर

18:17

1992 को बाबरी मस्जिद डेमलिन के बाद भारत

18:21

दंगों की आग में चल रहा था ऐसे में कई

18:23

इस्लामिक टेररिस्ट ग्रुप भारत पर अटैक

18:25

करने की फिराक में थे इन अटैक्स का पहला

18:27

एग्जांपल 12th मार्च 19 93 को देखने को

18:29

मिलता है जब मुंबई में एक के बाद एक पूरे

18:32

12 बॉम ब्लास्ट होते हैं जिनमें 257 लोगों

18:35

की जान चली जाती है और 1000 से ज्यादा लोग

18:38

घायल हो जाते हैं इन अटैक्स की छानबीन के

18:40

समय पता चलता है कि धमाकों में यूज किया

18:42

गया आरडी एक मुंबई में समुद्री रास्तों से

18:45

लाया गया था इस कारण समुद्र की सिक्योरिटी

18:47

टाइट कर दी जाती है और कोस्टगार्ड के

18:50

द्वारा मुंबई के कोस्टल एरियाज की लगातार

18:52

हेलीकॉप्टर और शिप्स के जरिए पेट्रोलिंग

18:54

की जाती है लेकिन अचानक से 2006 में इस

18:57

पेट्रोलिंग को नेवी की तरफ से रोक दिया

18:59

जाता है नेवी के इस फैसले के कारण भारत के

19:02

खिलाफ साजिश कर रहे टेररिस्ट ग्रुप्स को

19:04

भारत पर अटैक करने का एक अच्छा मौका मिल

19:06

जाता है भारत को इस बात की भनक भी नहीं थी

19:08

कि पाकिस्तान में बैठा लश्करए तयबा का

19:11

लीडर हफीज साहिद भारत पर एक ऐसा अटैग

19:13

प्लान कर रहा है जो पूरी दुनिया का ध्यान

19:15

खींच ले इससे पहले भी कई बार हाफिज सईद

19:18

भारत में कई अटैक्स करवा चुका था लेकिन इस

19:20

बार बड़े धमाके के लिए उसे कुछ ऐसे लोगों

19:23

की तलाश थी जो इस काम में उसका साथ दे सके

19:25

इत्तेफाक से ऐसे समय में उसकी मुलाकात

19:27

दाऊद सायद गिलानी से होती है जो अमेरिका

19:30

में रहकर ड्रग्स के बिजनेस का काम करता था

19:32

और इस काम के चलते कई बार जेल भी जा चुका

19:35

था दाऊद गिलानी के पिता सैद सलीम गिलानी

19:38

एक पाकिस्तानी डिप्लोमेट थे और मां एलिस

19:40

सेरिल हेडले अमेरिकन थी इस वजह से

19:42

अपीयरेंस में दाऊद बिल्कुल किसी फॉरेनर की

19:44

तरह दिखता था इस खास अपीयरेंस की वजह से

19:47

ही हाफिज सईद दाऊद का इस्तेमाल किसी खास

19:49

मकसद के लिए करना चाहता था 2001 से ही

19:52

हाफिज सईद लगातार दाऊद गिलानी के टच में

19:55

रहा और अपना मंसूबा पूरा करने के लिए 2002

19:58

में हाफिज सईद दाऊद को दावत के बहाने

20:00

पाकिस्तान बुलाता है दोनों जब मिलते हैं

20:02

तो हाफिज दाऊद को अपना प्लान बताता है

20:05

हालांकि अभी वो क्लियर अपना पूरा प्लान

20:07

दाऊद के सामने अनफोल्ड नहीं करता पर वो

20:10

इतना बता देता है कि उसे यह लड़ाई कश्मीर

20:12

के लिए लड़नी है दाऊद हाफिज सईद से काफी

20:15

इन्फ्लुएंस होता है और प्लान के लिए राजी

20:17

हो जाता है दाऊद को ट्रेनिंग के लिए कई

20:19

बार पाकिस्तान बुलाया जाता है और मल्टीपल

20:22

मीटिंग्स के बाद उसे लश्करए तयबा के फॉरेन

20:24

रिक्रूटमेंट विंग में ट्रांसफर कर दिया

20:26

जाता है पूरी ट्रेनिंग के बाद लश्कर तयबा

20:29

दाऊद को रिवील करता है कि अभी उसकी जरूरत

20:31

कश्मीर के लिए नहीं बल्कि मुंबई के लिए है

20:34

लेकिन इसकी तैयारी के लिए सईद दाऊद को

20:36

पहले यूएस लौटकर अपनी आइडेंटिटी को बदलने

20:38

के लिए कहता है दाऊद यूएस लौटकर अपनी मदर

20:41

की आइडेंटिटी को यूज कर दाऊद सायद गिलानी

20:43

से डेविड कोलमन हेडली बन जाता है यह सब

20:46

करने में पाकिस्तान की आईएसआई दाऊद की

20:48

हेल्प करती है अटैक करने से पहले भारत आकर

20:51

मुंबई की उन सभी लोकेशंस की डिटेल में

20:53

जानकारी लेना जरूरी था जिसके लिए डेविड

20:55

हेडली को मुंबई कई बार आना पड़ता इसलिए

20:58

डेविड हेडली बन चुका दाऊद गिलानी अपने

21:00

स्कूल फ्रेंड तहर हुसैन राना से

21:02

कोऑर्डिनेट करता है दरअसल तहब राना पहले

21:05

पाकिस्तान आर्मी में डॉक्टर था लेकिन बाद

21:07

में एक कैनेडियन लेडी से शादी करके 1997

21:11

में कनेडा चला जाता है और वहां काफी लंबे

21:13

समय से अपनी वीजा कंसल्टेंसी कंपनी चला

21:16

रहा होता है दाऊद गिलानी तहव्वुर के साथ

21:18

एक प्लान बनाता है और उसकी वीजा

21:20

कंसल्टेंसी कंपनी की एक ब्रांच मुंबई में

21:22

ओपन कर देता है ताकि उसे बार-बार मुंबई

21:25

आने जाने में कोई परेशानी ना हो प्लान के

21:27

मुताबिक इस पूरे काम को अंजाम देता है और

21:30

उसके फॉरेनर लुक और यूएस पासपोर्ट होने की

21:33

वजह से मुंबई में कोई उस पर शक भी नहीं

21:35

करता इस तरह वो कई बार मुंबई आता है और

21:38

समुद्र के रास्ते किन-किन फेमस जगहों पर

21:40

आकर अटैक किया जा सकता था ऐसी हर एक जगह

21:43

की जानकारी लश्कर ताबा को देता है दूसरी

21:45

तरफ पाकिस्तान में बैठा हाफिज सईद मिल रही

21:48

हर इंफॉर्मेशन की मदद से मुंबई पर अटैक

21:50

करने की प्लानिंग करता रहता है अटैक की

21:52

प्लानिंग हो जाने के बाद उसे एग्जीक्यूट

21:54

करने के लिए कुछ लड़कों की जरूरत थी जो

21:57

मुंबई जाकर इस प्लान को सफल बनाते इसलिए

21:59

देर ना करते हुए आफिस सईद लड़कों के

22:01

सिलेक्शन और ट्रेनिंग का काम जकी और रहमान

22:04

लखवी को सौंप है लखवी इस काम में अपने साथ

22:07

जरार शाह अबू काफाम आजा को भी शामिल करता

22:10

है यह लोग ऐसे नौजवान लड़कों की तलाश करते

22:13

हैं जो घर से भागे हुए हो या जिनकी शादी

22:16

ना हुई हो ताकि उन लोगों के आगे पीछे कोई

22:18

ना हो और आसानी से मजहब और जिहाद की आड़

22:21

में इनका ब्रेन वॉश किया जा सके काफी

22:23

खोजबीन के बाद 32 लड़कों को सिलेक्ट किया

22:25

जाता है शुरुआत में सेलेक्ट किए गए सभी

22:27

लड़कों को बताया जाता है कि उन्हें कश्मीर

22:30

को आजाद कराने के लिए चुना गया है मजहब के

22:32

नाम पर उनको भटका जाता है उन्हें कहा जाता

22:34

है कि अल्लाह ने उन्हें इस पाक काम के लिए

22:37

खुद चुना है कट्टरता से प्रभावित सभी

22:39

लड़के प्लान को अंजाम देने के लिए

22:41

ट्रेनिंग में जीजन लगा देते हैं ट्रेनिंग

22:43

थ्री राउंड्स में डिवाइडेड होती है पहले

22:45

राउंड की ट्रेनिंग दौरा ए अम्मा दूसरी

22:47

राउंड की ट्रेनिंग दौरा ए सफा और थर्ड

22:50

राउंड की ट्रेनिंग दौरा ए खासा के नाम से

22:52

होती है पूरी ट्रेनिंग के दौरान इनके

22:54

सामने भारत के मुस्लिम्स की कंडीशन को

22:56

बहुत बुरी तरह से पेश किया जाता है इनके

22:59

दिमाग में भारत को लेकर इतना जहर घोला

23:01

जाता है कि ये चाहकर भी कुछ और सोच ही

23:03

नहीं पाते और हर हाल में अपने मकसद को

23:05

अंजाम देने के लिए तैयार हो जाते हैं

23:07

ट्रेनिंग के दौरान सभी लड़कों को कई घंटों

23:09

तक हथियार चलाना सिखाया जाता है हैंड

23:12

ग्रेनेड फेंकने और रॉकेट लांचर दागने की

23:14

भी ट्रेनिंग दी जाती है दो राउंड की

23:16

ट्रेनिंग तो सभी लड़के जैसे-तैसे कर लेते

23:18

हैं जिसमें खाने और नमाज पढ़ने के अलावा

23:21

किसी और काम की छूट नहीं होती लेकिन दौरा

23:23

एक खासा की ट्रेनिंग के दौरान सभी लड़कों

23:25

को 60 घंटों तक भूखा रहकर पहाड़ों पर

23:28

चढ़ने की ट्रेनिंग दी जाती है यह ट्रेनिंग

23:30

इस कदर सख्त होती है कि कई लड़के इसे बीच

23:32

में ही छोड़कर भाग जाते हैं तीसरे फेज की

23:35

ट्रेनिंग के बाद केवल 15 लड़के बचते हैं

23:37

जिन्हें फिर दौरा ए रिबात नाम की

23:39

इंटेलिजेंस ट्रेनिंग भी दी जाती है इस तरह

23:42

अगस्त 2008 आते-आते पूरी ट्रेनिंग खत्म

23:45

होती है इसके बाद मुंबई पर अटैक करने के

23:47

लिए 10 लड़कों को चुन लिया जाता है

23:49

सिलेक्शन के बाद इन्हें दो-दो के पांच

23:51

ग्रुप्स में बांट दिया जाता है सभी को

23:53

भारत में इस्तेमाल करने के लिए एम्युनेशन

23:55

सैटेलाइट फोन मैप और कुछ पैसे भी दिए जाते

23:58

हैं 27 सितंबर 2008 को मुंबई पर अटैक करने

24:02

की प्लानिंग फिक्स होती है जिसके लिए

24:03

ट्रेन किए गए सभी लड़कों को कराची बुलाया

24:06

जाता है लेकिन लास्ट मोमेंट पर इसे रोक

24:08

दिया जाता है उसी महीने दिल्ली में लगातार

24:11

पांच बॉम ब्लास्ट हुए थे जिस वजह से

24:13

दिल्ली और मुंबई जैसी जगहों पर रेड अलर्ट

24:15

था और जगह-जगह छापे मार हो रही थी इन सभी

24:18

खबरों को देखते हुए लश्कर की लीडरशिप इस

24:21

हमले को कुछ दिन के लिए डिले कर देती है

24:23

इसके बाद अक्टूबर में एक बार फिर सभी 10

24:25

लड़कों को बुलाया जाता है और फिर से

24:27

ट्रेनिंग के कुछ रिमेनिंग पार्ट्स को पूरा

24:30

किया जाता है इस बार सभी लड़कों को

24:32

स्विमिंग करने और बोट चलाने की ट्रेनिंग

24:34

दी जाती है सभी को वीडियो के जरिए टारगेट

24:36

करने वाली जगहों को बड़ी स्क्रीन पर

24:38

दिखाया जाता है इसमें टारगेट तक पहुंचने

24:41

के लिए कौन सी रोड का इस्तेमाल करना है और

24:43

कैसे इन जगहों पर अटैक करना है ए टू जेड

24:46

सब बताया जाता है अटैक मुंबई में किया

24:48

जाना था इसलिए सभी लड़कों को मराठी की भी

24:50

ट्रेनिंग दी जाती है उन्हें ऐसे कपड़े

24:52

पहनने को दिए जाते हैं जो उस समय मुंबई के

24:54

यूथ के बीच ट्रेंड में थे सभी के हाथों

24:57

में कलावा भी बांध जाता है ताकि ये दिखने

24:59

में हिंदू लगे इसके बाद फाइनली अटैक करने

25:02

के लिए सभी लड़कों को 22 नवंबर की सुबह एक

25:05

छोटे से जहाज में बैठाकर रवाना कर दिया

25:07

जाता है कई घंटों तक समुंदर में चलने के

25:10

बाद सभी को दूसरी बोट अल हुसैनी में शिफ्ट

25:12

कर दिया जाता है अल हुसैनी में पहले से ही

25:15

सभी के लिए दो-दो बैग रखे थे जिनमें अटैक

25:17

करने के लिए हर तरह के हथियार मौजूद थे

25:20

अगली सुबह उन्हें एक कुबेर नाम का इंडियन

25:22

शिप दिखाई देता है जिसको अमर सिंह सोलंकी

25:25

चला रहे थे उस शिप में उनके साथ तीन और

25:27

लोग मौजूद थे यहां पर आतंकी अपना जहाज

25:30

खराब होने का बहाना बनाकर कुबैर में बैठे

25:32

लोगों से मदद की गुहार लगाते हैं लेकिन

25:35

जैसे ही जहाज पास आता है वैसे ही सभी

25:37

लड़के कुबेर पर मौजूद तीनों लोगों को

25:39

मारकर कैप्टन अमर सिंह को मुंबई की तरफ

25:42

जहाज को चलाने के लिए फोर्स करते हैं जैसे

25:44

ही जहाज मुंबई के नजदीक आता है आतंकी अमर

25:47

सिंह को भी मार देते हैं और शिप को लेकर

25:49

26 नवंबर की शाम तक मुंबई के किनारे तक

25:52

पहुंच जाते हैं इसके बाद यह दसों आतंकी

25:55

मुंबई में किस तरह आतंक मचाते हैं यह तो

25:57

हम जान ही चुके हैं लेकिन इन टेररिस्ट

25:59

अटैक को रोकने और हॉस्टेस को रेस्क्यू

26:02

करने के लिए भारत सरकार क्या एक्शन लेती

26:04

है यह जानने से पहले यह बताते चले कि 2611

26:07

के अटैक से कुछ दिन पहले ही यूएस ने

26:09

लश्करए तयबा के अल हुसैनी शिप के

26:12

कोऑर्डिनेट्स भारत सरकार को प्रोवाइड किए

26:14

थे इसके बावजूद इंडियन अथॉरिटीज ने ना तो

26:16

कोऑर्डिनेट्स की हेल्प से अल हुसैनी शिप

26:18

को ट्रैक किया और ना ही कोई एक्शन लिया

26:21

यहां तक कि नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर एमके

26:23

नारायणन ने नेवी और कोस्टगार्ड के साथ

26:26

कार्रवाई के योग्य खुफिया जानक भी साझा की

26:29

थी लेकिन फिर भी समुद्र में ना तो अल

26:31

हुसैनी शिप को पकड़ा गया और ना ही इन

26:33

खौफनाक हमलों को अंजाम देने वाले हथियारों

26:35

से लेस आतंकियों को रोका जा सका जिसका

26:38

परिणाम आज मुंबई को झेलना पड़ रहा था अटैक

26:41

से पहले इंडियन अथॉरिटीज द्वारा कोई भी

26:43

एक्शन ना लेने की वजह से मुंबई में पहले

26:45

से ही काफी तबाही हो चुकी थी इसके अलावा

26:47

अभी तक मुंबई पुलिस सिर्फ दो आतंकियों को

26:50

कंट्रोल कर पाई थी अभी भी आठ टेररिस्ट तीन

26:52

जगहों पर अपना कब्जा जमाए हुए थे दो आतंकी

26:55

ओ ब्रॉय होटल में तो चार आतंकी ताज होटल

26:57

में मौजूद थे वही दो आतंकी नरीमन हाउस को

27:00

अपने कंट्रोल में किए हुए थे कसाब के

27:02

पकड़े जाने और ताज होटल नरीमन हाउस और

27:05

ओबराय होटल में हो रहे लगातार धमाकों के

27:07

बाद आखिरकार महाराष्ट्र गवर्नमेंट फुल्ली

27:10

एक्टिव होती है सबसे पहले महाराष्ट्र

27:12

गवर्नमेंट सेंट्रल गवर्नमेंट से हेल्प

27:14

मांगती है न्यू दिल्ली से एनएसजी कमांडोज

27:16

को तैयार किया जाता है लेकिन एनएसजी को

27:18

टाइम से एयरक्राफ्ट नहीं मिल पाने की वजह

27:20

से उन्हें मुंबई आने में समय लगने वाला था

27:23

इसलिए काउंटर अटैक करने और सिचुएशन को

27:25

संभालने का जिम्मा मार्कोस को दिया जाता

27:27

है मार्कोस यानी मरीन कमांडोज को अनजान

27:30

जगहों पर शानदार ऑपरेशंस के लिए जाना जाता

27:33

है यह कमांडोज हर तरह के हथियारों को

27:35

चलाने में फुली ट्रेंड होते हैं इसलिए इस

27:37

टेरर अटैक को हैंडल करने के लिए मार्कोस

27:40

को बुलाया जाता है लेकिन काफी लेट

27:41

इंफॉर्मेशन मिलने की वजह से मार्कोस को

27:43

अटैक वाली जगहों पर पहुंचने में कई घंटों

27:46

की देरी हो जाती है मार्कोस 27 नवंबर की

27:49

रात करीब 2 बजे मुंबई के आईएनएस अभिमन्यु

27:52

पहुंचते हैं और वहां से दो टुकड़ियों में

27:54

बढकर ताज और ओबराय होटल की कमान संभालते

27:56

हैं मार्कोस का सबसे पहला टास्क होस्टेजेस

27:59

को सेफली वहां से रेस्क्यू करने का था

28:01

मार्कोस की एक टीम जो ताज होटल पहुंचती है

28:03

उन्हें वहां होटल के मैनेजर द्वारा होटल

28:06

का नक्शा दिया जाता है लेकिन नक्शे से

28:07

उन्हें कोई खास मदद नहीं मिलती इसके अलावा

28:10

ना तो उन्हें ताज होटल में मौजूद चार

28:12

आतंकियों के लोकेशन के बारे में कुछ पता

28:14

था ना ही होटल में छुपे लोगों के बारे में

28:16

कोई जानकारी थी मार्कोस की दूसरी टीम भी

28:19

ओय होटल में इन्हीं मुश्किलों से जूझ रही

28:21

होती है इस सिचुएशन में मार्कोस की दोनों

28:23

टीम्स के लिए यह काम अंधेरे में तीर चलाने

28:26

जैसा था हालांकि अपनी जान की बाजी लगाकर

28:28

मार्कोस ताज और ओबराय होटल में घुसकर

28:31

आतंकियों की छानबीन करने लगते हैं मार्कोस

28:33

को तो आतंकियों के लोकेशन का कोई पता नहीं

28:35

था लेकिन आतंकियों को उनके हर एक कदम की

28:38

खबर होती है वो ऐसे कि मीडिया मार्कोस के

28:40

हर एक एक्शन को लाइव टेलीकास्ट कर रहा

28:42

होता है जिस पर पाकिस्तान में बैठे इनके

28:44

हैंडलर की भी नजर थी जो हर एक खबर फोन के

28:47

जरिए आतंकियों तक पहुंचा रहा था आतंकियों

28:50

को मार्कोस की लोकेशन मिलते ही वो उनकी

28:52

तरफ फायरिंग करना और ग्रेनेड्स फेंकना

28:55

शुरू कर देते हैं जिसके काउंटर में

28:56

मार्कोस ने भी ताब तोड़ फायरिंग की आतंकी

28:59

इस काउंटर अटैक से सरप्राइज थे क्योंकि

29:01

अभी तक उनका सामना केवल मुंबई पुलिस से

29:04

हुआ था जिनके पास साधारण बंदूक थी जिस

29:06

कारण वह आतंकियों के मॉडर्न वेपंस के आगे

29:09

कहीं भी टिक नहीं पा रहे थे लेकिन यहां

29:10

मार्कोस का अटैक इतना जोरदार था कि आतंकी

29:13

चार कदम पीछे हटने को मजबूर हो गए इसी

29:16

मौके का फायदा उठाकर मार्कोस ने ताज होटल

29:18

से 150 और ओबरॉय डेंट होटल से 200 लोगों

29:21

को सुरक्षित निकाल लिया हालांकि दोनों ही

29:24

जगहों पर अभी भी कई लोग फंसे हुए थे जो

29:26

किसी भी पल आतंकियों के हमले का शिकार हो

29:29

सकते थे लेकिन इस दौरान राहत की बात यह

29:31

होती है कि सुबह के करीब 5:00 बजे आ 76

29:34

एयरक्राफ्ट में सवार 200 एनएसजी कमांडोज

29:37

की एक टीम मुंबई पहुंच चुकी होती है

29:39

एनएसजी कमांडोज मुंबई पहुंचकर सबसे पहले

29:42

मुंबई पुलिस और मार्कोस से अटैक रिलेटेड

29:44

सारी इंफॉर्मेशन गैदर करते हैं और तीन

29:46

टुकड़ियों में बढकर ताज होटल ओब रॉय होटल

29:49

और नरीमन हाउस की तरफ रवाना हो जाते हैं

29:51

इस तरह एनएसजी का ऑपरेशन ब्लैक टॉरनेडो

29:53

शुरू हो जाता है 27 नवंबर की सुबह 6:00

29:56

बजे कमांडोज की पहली टीम टीम ओबराय

29:58

ट्राइडेंट पहुंचती है जिसकी कमान कर्नल

30:00

बीएस राठी संभाले होते हैं कर्नल राठी के

30:03

नेतृत्व में लूटने कर्नल आर के शर्मा और

30:05

मेजर बी भारत अपनी टीम को लेकर ओब्राय

30:08

होटल में दाखिल होते हैं लेकिन मार्कोस की

30:10

तरह एनएसजी कमांडोज को भी आतंकियों और बचे

30:12

हुए बंधकों की लोकेशन के बारे में कोई

30:15

जानकारी नहीं थी लेकिन वोह अपने ट्रेनिंग

30:17

और एक्सपीरियंस का इस्तेमाल करते हुए

30:18

फ्लोर बाय फ्लोर चढ़ने लगते हैं 19th

30:21

फ्लोर पर पहुंचते ही आतंकियों की तरफ से

30:23

फायरिंग शुरू हो जाती है साथ ही ग्रेनेड्स

30:25

फेंककर आतंकी पूरे फ्लोर पर धुआ धुआ कर

30:28

देते हैं इसी बीच एनएसजी की दूसरी टीम ताज

30:30

होटल की सिचुएशन को हैंडल कर रही होती है

30:32

जिसका नेतृत्व कर्नल सुनील शेरन कर रहे

30:35

होते हैं जिनकी कमांड में मेजर संजय

30:37

खंडवाल और मेजर संदीप उन्नी कृष्णन भी

30:39

होते हैं ताज होटल के हालात ओबरॉय होटल से

30:42

भी ज्यादा भयानक थे यहां चार आतंकी थे

30:44

जिन्होंने ताज होटल के कई कमरों को आग के

30:47

हवाले कर दिया था ताज होटल आग की लपटों

30:50

में जल रहा था और इसी आग और धुए की वजह से

30:52

कई फ्लोर्स पर कमांडोज का सांस लेना भी

30:55

मुश्किल हो जाता है ऐसे में आतंकियों को

30:57

ढूंढ खत्म करने और होटल में फंसे हुए

31:00

लोगों को बचाने के लिए एनएसजी को रिग्रुप

31:02

होना पड़ा 51 स्पेशल एक्शन ग्रुप के 10

31:05

कमांडोज की टीम को लीड कर रहे मेजर संदीप

31:07

उन्नी कृष्णन ने होटल की सेंट्रल

31:09

स्टेयरकेस के जरिए चढ़कर टेररिस्ट पर अटैक

31:12

करने का प्लान बनाया प्लान के मुताबिक जब

31:14

कमांडो सेंट्रल स्टेयर केस से ऊपर चढ़ने

31:16

लगे तभी घात लगाए बैठे आतंकियों ने

31:19

अंधाधुन फायरिंग करना शुरू कर दिया जिससे

31:21

सात गोलियां कमांडो सुनील कुमार 14 को लगी

31:24

और वह बुरी तरह घायल हो गए आतंकी उन पर और

31:27

हमला कर करते इससे पहले ही सुनील को कवर

31:29

देते हुए संदीप उन्नी कृष्णन और उनकी टीम

31:32

ने आतंकियों पर काउंटर अटैक कर दिया जब

31:34

आतंकी थोड़ा पीछे हटे तो संदीप ने टीम से

31:37

सुनील को जल्द से जल्द फर्स्ट एड देने के

31:39

लिए कहा और अकेले ही सीढ़ियों पर चढ़ गए

31:41

संदीप ने जाते हुए पीछे मुड़कर अपनी टीम

31:44

से कहा मेरे पीछे मत आना मैं संभाल लूंगा

31:46

इतना कहकर वो ऊपर चढ़ गए संदीप और चारों

31:49

आतंकियों के बीच ताबड़ तोड़ गोलीबारी शुरू

31:52

हो गई अकेले संदीप उन्नी कृष्णन आतंकियों

31:54

से ऐसा भिड़े कि चारों आतंकी होटल के नदन

31:57

एंड के कॉर्नर में छिपने को मजबूर हो गए

32:00

लेकिन इस मुठभेड़ में संदीप पर भी गोलियों

32:02

की बौछार हुई थी जिस कारण दुश्मनों को मार

32:04

गिराने की कोशिश में उन्हें अपने प्राण

32:06

न्योछावर करने पड़े इसी दौरान 20 एनएसजी

32:09

कमांडोज की तीसरी टीम 27 नवंबर की शाम

32:12

करीब 5:30 बजे नरीमन हाउस की लोकेशन पर

32:14

पहुंच चुकी होती है कमांडोज बिल्डिंग में

32:17

ग्राउंड फ्लोर में घुसने की बहुत कोशिश

32:19

करते हैं लेकिन वहां मौजूद दोनों आतंकी

32:21

नीचे से ऊपर जाने के सारे एंट्री पॉइंट्स

32:24

को हथ गोलों से तबाह कर चुके थे ऐसे में

32:26

एनएसजी बिल्डिंग में छत के ऊपर से घुसने

32:29

का प्लान बनाते हैं अगले दिन 28 नवंबर की

32:31

सुबह 7:30 बजे नरीमन हाउस की छत पर

32:34

हेलीकॉप्टर से कमांडोज को एयर ड्रॉप किया

32:36

जाता है इसी बीच मीडिया कमांडोज के हर

32:39

एक्शन की एक-एक फोटो और वीडियो को लाइव

32:41

टेलीकास्ट कर रहा था जिससे कमांडोज की हर

32:44

एक्टिविटी का पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स

32:46

को टीवी के जरिए पता चल रहा होता है

32:48

हैंडलर्स कमांडोज की हर एक एक्टिविटी की

32:50

खबर फोन से आतंकियों तक पहुंचा रहे थे

32:53

नरीमन हाउस में छुपकर बैठे दोनों आतंकियों

32:55

ने कमांडोज की लाइव अपडेट मिलते ही उन पर

32:58

ग्रेनेड्स फेंकना और फायरिंग करना शुरू कर

33:00

दिया जिसका निशाना कमांडो गजेंद्र सिंह

33:03

बिष्ट बने और वह वही शहीद हो गए ओ ब्रॉय

33:05

ट्राइडेंट होटल ताज होटल और नरीमन हाउस

33:08

तीनों ही लोकेशंस पर कमांडोज काफी

33:10

मुश्किलों का सामना कर रहे होते हैं आतंकी

33:13

चूहे की तरह बिलों में छिपकर बैठे थे और

33:15

लगातार छिपकर हमला कर रहे थे इसलिए

33:18

कमांडोज को दुश्मनों से लड़ने के लिए

33:20

बहादुरी के साथ-साथ समझदारी और चालाकी से

33:22

भी काम लेना जरूरी था कमांडोज ने समझदारी

33:25

दिखाते हुए ओ ब्रॉय होटल में आतंकियों को

33:28

खत्म करने के लिए कोऑर्डिनेट अटैक करने का

33:30

प्लान बनाया जिसके चलते 19th फ्लोर के एक

33:33

कमरे में छिपकर बैठे दोनों आतंकियों पर

33:35

कमांडोज अंदर से अटैक करते हैं तो वही

33:37

होटल के सामने एयर इंडिया की बिल्डिंग के

33:40

11थ फ्लोर पर स्नाइपर्स को तैनात कर दिया

33:42

जाता है इस तरह आतंकी दोहरे हमले के बीच

33:45

फंस गए जिस कमरे में आतंकी मौजूद थे उसकी

33:47

खिड़की पर स्नाइपर्स की तरफ से कई राउंड्स

33:50

फायर किए जाते हैं जिसमें एक आतंकी फौरन

33:52

ढेर हो जाता है तो वही कुछ ही देर बाद बचे

33:54

हुए दूसरे आतंकी को होटल में मौजूद

33:57

कमांडोज मौत के घाट उतार देते हैं इस तरह

33:59

28 नवंबर की दोपहर 3 बजे तक एनएसजी ने

34:02

ओबरॉय ट्राइडेंट को आतंकियों की गिरफ्त से

34:04

आजाद करवा लिया लेकिन इसी बीच नरीमन हाउस

34:07

में गजेंद्र बिष्ट के शहीद होने से

34:09

कमांडोज बेहद गुस्से में होते हैं अपने

34:11

साथी की जान का बदला लेने और बिल्डिंग के

34:14

अंदर फंसे लोगों को बचाने के लिए कमांडोज

34:16

दोनों आतंकियों को ढूंढकर उन पर हमला करना

34:19

शुरू कर देते हैं मेजर संदीप सेन को एक

34:21

क्लू मिलता है और व एक कमरे में दो हथ

34:23

गोले फेंक देते हैं जिसमें मौजूद एक

34:25

आतंकवादी आग की लपटों में जलकर राख हो

34:28

जाता है अब दूसरा आतंकी बचा होता है पर

34:31

उसके पास भी बचने का कोई मौका नहीं होता

34:33

सभी बचे हुए हॉस्टेस को बाहर निकालकर रेमन

34:36

हाउस के अंदर कई हथ गोले फेंके जाते हैं

34:38

जिनकी चपेट में आकर दूसरा आतंकी भी वही

34:41

मरकर ढेर हो जाता है ओब्राय रेडेंट होटल

34:43

और नरीमन हाउस अब सेफ थे लेकिन ताज होटल

34:46

में अभी भी कोहराम मचा होता है मेजर संदीप

34:49

के शहीद होने से निराश कमांडोज को अपने

34:51

कर्तव्य का पालन करने और मेजर संदीप के

34:54

हथियारों से बदला लेने के लिए एनएसजी चीफ

34:56

जे के दत्त कमांडोज में फिर से जोश भर

34:59

देते हैं मेजर खंडवाल और उनके कमांडोज

35:01

आतंकियों की खोज में होटल के चप्पे-चप्पे

35:04

को छानने लगते हैं तभी उन्हें ताज होटल के

35:06

वसाबी रेस्टोरेंट से गोलियों की आवाजें

35:09

सुनाई देती है कमांडोज ने बिना देर किए कई

35:11

हथ गोले वसाबी की तरफ फेंक दिए जिससे

35:14

वसाबी रेस्टोरेंट आग की लपटों में होता है

35:16

और जान बचाने के लिए आतंकी जैसे ही

35:18

सीढ़ियों की तरफ भागते हैं तभी कमांडोज

35:21

चारों आतंकियों को गोलियों से छल्ली कर

35:23

डालते हैं इस तरह 29 नवंबर की सुबह 8 बजे

35:26

तक ताज होटल भी स हो जाता है 10 में से नौ

35:29

आतंकी मारे जा चुके थे और एक आतंकी अजमल

35:32

कसाब को जिंदा पकड़ा जा चुका था 26 नवंबर

35:35

की शाम को शुरू हुआ यह मौत का खेल 29

35:38

नवंबर की सुबह खत्म हुआ इस अटैक में 166

35:41

बेकसूर लोग मारे गए जबकि 300 से ज्यादा

35:44

लोग गंभीर रूप से घायल हुए 60 घंटों तक

35:46

सांस रोक करर बैठी मुंबई आखिरकार राहत की

35:49

सांस लेती है लेकिन 10 लड़कों का मुंबई

35:52

में घुसकर ऐसी खौफनाक घटना को अंजाम देना

35:54

भारत के लिए एक बड़ा इंटेलिजेंस फेलियर था

35:57

इस घटना ने ने भारत सरकार को अपनी सुरक्षा

35:59

को लेकर सोचने के लिए फिर से मजबूर कर

36:01

दिया इस पूरी घटना के बाद भारत समेत पूरी

36:04

दुनिया में काफी वक्त तक हलचल रही जहां

36:07

वर्ल्ड मीडिया में इस आतंकी हमले की निंदा

36:09

हो रही थी तो वहीं महाराष्ट्र में

36:11

मंत्रियों के इस्तीफे का दौर जारी था

36:13

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलस राव

36:15

देशमुख उपमुख्यमंत्री आरआर पाटिल और देश

36:18

के गृहमंत्री शिवराज पाटिल अपने पदों से

36:20

इस्तीफा दे देते हैं इंडियन शेयर मार्केट

36:22

क्रैश कर चुका होता है मुंबई में फिल्मों

36:25

की शूटिंग रोक दी जाती है और इंग्लैंड

36:27

क्रिकेट टीम भारत से ऑन गोइंग टेस्ट मैच

36:29

छोड़कर वापस इंग्लैंड लौट जाती है वहीं

36:32

भारत की जनता इस हमले के लिए पाकिस्तान से

36:34

बदला लेने के लिए भारत सरकार से अपील करती

36:37

है प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पाकिस्तान के

36:39

खिलाफ एक्शन लेने के लिए भारतीय सेनाओं के

36:42

अध्यक्षों के साथ लगातार मीटिंग्स करते

36:44

हैं पहले गुप्त तरीके से पाकिस्तान में

36:46

घुसकर लश्करए तयबा के सेंटर को तबाह करने

36:49

का विचार बनाया जाता है फिर एयरफोर्स के

36:51

जरिए हवाई हमलों से पाकिस्तान के आतंकी

36:53

संगठनों को उड़ाने के बारे में सोचा जाता

36:55

है लेकिन अंत में कोई भी ऑ ना करने का

36:58

फैसला लिया जाता है इस दौरान पाकिस्तान

37:00

पहले इस अटैक में अपनी इवॉल्वमेंट को लेकर

37:03

साफ इंकार करता है लेकिन बाद में कई फोन

37:05

रिकॉर्डिंग्स और पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब

37:08

के बयान से जब साफ होता है कि दसों

37:10

आतंकवादी लश्करए तयबा के थे और हमले के

37:13

दौरान उन्हें पाकिस्तान में बैठे उनके

37:15

हैंडलर्स से इंस्ट्रक्शंस मिल रहा था तो

37:17

भारत सरकार और यूएन के दबाव में पाकिस्तान

37:19

की तरफ से लश्करए तयबा और जमात उदावा के

37:22

कुछ लोगों को गिरफ्तार किया जाता है साथ

37:24

ही अमेरिका भी दाऊद सईद गिलानी और तह

37:27

हुसैन राना को इस हमले का दोषी मानते हुए

37:29

अरेस्ट कर जेल में डाल देता है भारत इस

37:32

आतंकी हमले का बदला तो नहीं लेता लेकिन

37:34

आतंकवाद पर लगाम कसने के लिए भारत सरकार

37:37

द्वारा 31 दिसंबर 2008 को नेशनल

37:40

इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को एस्टेब्लिश किया

37:42

जाता है एनआईए को भारत में टेररिस्ट

37:44

एक्टिविटीज को इन्वेस्टिगेट करने का काम

37:46

सौंपा जाता है इसके अलावा एनएसजी के

37:49

सेंटर्स को बढ़ाने का काम भी किया जाता है

37:51

मुंबई चेन्नई और कोलकाता के साथ-साथ कई

37:54

जगहों पर एनएसजी के सेंटर्स खोले जाते हैं

37:56

जिससे कमांडोज बिना किसी देरी के हमले

37:58

वाली लोकेशन पर पहुंचकर सिचुएशन को संभाल

38:01

सके इसके अलावा आतंकवादी अजमल कसाब पर कई

38:04

सालों तक ट्रायल चलता है जिसके चलते

38:06

पाकिस्तान के लश्करए तयबा और इस अटैक्स को

38:08

लेकर कई राजों का खुलासा होता है ट्रायल

38:11

के दौरान सैकड़ों बेकसूर की जान लेने वाला

38:13

आतंकी कसाब अपनी जान की भीख मांगता रहा

38:16

लेकिन इस अटैक के सरवाइवर हेड कांस्टेबल

38:18

अरुण जादव की गवाही की बदौलत 2010 में

38:21

कसाब को फांसी की सजा देने का फैसला होता

38:24

है और फाइनली 21 नवंबर 2012 को पुणे की

38:28

जेल में कसाब को फांसी दे दी जाती है उसकी

38:30

मौत के साथ ही इस हमले के आखिरी आतंकवादी

38:33

को भी मिट्टी में मिला दिया जाता है

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